Category : मेरा-गांव

हम सब गांव से ही निकल कर शहर आए हैं. कोई पढ़ाई के सिलसिले में निकला तो कोई कमाई के. जब गांव छूट जाता है तो लगता है कि वहां ये होता तो नहीं आते, वो होता तो नहीं आते ! गांव-खेत और किसान हमारे लिए जमीन से जुड़े रहने का भी काम करेंगे.
पहले तो किसानों और गांव के लिए जमकर लिखेंगे. फिर सरकार के पास जाएंगे. कृषि से जुड़ी सरकारी योजनाओं के सहज प्रचार-प्रसार के लिए सरकार से बात करेंगे.
गांधी के सपनों का गांव बने. हमारी हर रिपोर्ट का ध्येय यही होगा. खेती के तरीकों को तो लिखेंगे ही, साथ ये भी लिखेंगे कि किसान को कैसे बाजार से जोड़ा जाए ताकि उसको अपने उत्पादन का सही दाम मिल सके.

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