लोकसभा चुनाव 2019 : केवल बेगूसराय में ही राजद के खिलाफ क्यों है लेफ्ट?

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बिहार की चर्चित लोकसभा सीट बेगूसराय से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार घोषित हो गए हैं.

रविवार को पटना के जनशक्ति भवन स्थित पार्टी कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं के साथ खुद कन्हैया द्वारा प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी दी गई.

यह भी ऐलान हुआ कि सभी वाम दल आपस में बातचीत कर आगे यह फैसला लेंगे कि और कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाएंगे. लेकिन इसके अलावा बाक़ी सभी सीटों पर सीपीआई, बीजेपी को हराने के लिए महागठबंधन के उम्मीदवार को समर्थन करेगा.

लेकिन सवाल ये है कि अगर सीपीआई महागठबंधन में भाजपा को हराने के लिए है तो बेगूसराय से महागठबंधन ही उसे क्यों हराना चाहता है?

क्योंकि यूपीए महागठबंधन की सीट शेयरिंग में बेगूसराय की सीट राजद के खाते में गई है. और चर्चा है कि राजद ने तनवीर हसन के रूप में बेगूसराय से अपना उम्मीदवार भी निश्चित कर लिया है. केवल औपचारिक घोषणा होनी शेष रह गई है.

सीपीआई ने क्या कहा प्रेस वार्ता में ?

कन्हैया कुमार के नाम पर मुहर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमिटी ने लगाया है. इसकी औपचारिक घोषणा करने के बाद सीपीआई के वरिष्ठ नेता कॉमरेड नारायणा ने प्रेस वार्ता में यह कहते हुए अपनी बात पूरी की, कि महागठबंधन में उन्हें उम्मीदों के अनुरूप सीटें नहीं मिलीं, फिर भी वे भाजपा को हराने के लिए प्रतिबद्ध हैं इसलिए जिन सीटों पर वाम दलों के उम्मीदवार नहीं खड़ें होंगे, उनपर भी वे महागठबंधन के उम्मीदवारों को अपना समर्थन देंगे.

और जैसे ही कॉमरेड नारायणा का बोलना खत्म हुआ, वार्ता में मौजूद पत्रकारों के सवालों के बौछार होने लगे. एक सवाल जो सबसे कॉमन था वो ये कि आखिर बेगूसराय सीट पर जहां से पहले ही पार्टी की राज्य इकाई ने कन्हैया को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, वहां पर राजद से बात क्यों नहीं बन पायी?

बेगूसराय के अलावा किन सीटों पर लड़ेंगे वामदल

इसका जवाब देने से पहले ही भाकपा के राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया कि, “ऐसा नहीं है कि केवल बेगूसराय से ही सीपीआई अपना उम्मीदवार उतारेगी. बल्कि इसके अलावा खगड़िया, मधुबनी और मोतिहारी में भी पार्टी अपने कैंडिडेट उतारना चाहती है. केंद्रीय चुनाव समिति जल्द ही उम्मीदवारों के नाम तय कर लेगी. “

कॉमरेड नारायणा ने इन सवालों के जवाब में कहा कि हमलोग इस मामले में बुद्धिमान हैं. हमारा मकसद बीजेपी को हराना है, ना कि महागठबंधन को. ये बात महागठबंधन के दूसरे साथियों को भी समझना चाहिए.

वहां मौजूद पत्रकार वरिष्ठ नेताओं से मिले इन जवाबों से संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने यह मांग की, कि इन सवालों के जवाब खुद कन्हैया कुमार दें. क्योंकि वो भी वहां मौजूद थे.

इस पर पहले तो वरिष्ठ नेताओं द्वारा मना कर दिया गया. फिर बाद में जब पत्रकारों ने यह कहना शुरु कि अगर कन्हैया जेएनयू में भाषण दे सकते हैं, तो यहां पटना में पहली बार प्रेस वार्ता करने में उन्हें डर क्यों लग रहा है?

वार्ता में कन्हैया से बुलवाने के लिए पत्रकारों का दबाव बढ़ता जा रहा था. इसी बीच सीनियरों से जरा सी गुफ्तगू के बाद आखिरकार कन्हैया खुद माइकों के बीच आ गए. पहले भूमिका बनायी और फिर खुद पत्रकारों के सवालों का जवाब देने लगे.

कन्हैया कुमार, सीपीआई नेता।

इसी में बात तेजस्वी यादव की आ गयी, कि क्या तेजस्वी नहीं चाहते हैं कि कन्हैया राजनीति में आएं? नहीं तो फिर बेगूसराय की सीट उन्होंने अपने कोटे में क्यों ले ली? राजद के तनवीर हसन के लड़ने की चर्चा क्यों चल रही है? और कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि तेजस्वी ने कन्हैया पर घास नहीं डाला!

इसपर जवाब खुद कन्हैया कुमार ने दिया. बकौल कन्हैया, “मैं कोई गधा नहीं हूं जो मुझपर कोई घास डालेगा. मैं इंसान हूं और रोटी खाता हूं. रोटी की ही बात भी करता हूं. इसलिए मैं इसकी परवाह भी नहीं करता कि कोई मुझपर घास डालेगा कि नहीं. जहां तक बात तनवीर जी की है तो मैं आपको स्पष्ट कर दूं कि वो लड़ाई में हैं ही नहीं. मेरी लड़ाई सिर्फ भाजपा से है. रही बात की जो हम समझ रहे हैं, वो (तेजस्वी) ये बात क्यों नहीं समझ रहे हैं तो मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि वो भी एक राजनीतिक दल चलाते हैं, उनकी अपनी प्रतिबद्धताएं हैं, उनका अपना गुणा-गणित है. अब ये बात उनसे पूछनी चाहिए कि जो हम समझ रहे हैं वो ये क्यों नहीं समझ रहे हैं.”

बीबीसी के बोले बिहार कार्यक्रम में कन्हैया ने कहा था कि वे भाजपा के खिलाफ पड़ने वाले वोटों को बिखरने नहीं देंगे. लेकिन अब का सच यही है कि राजद के उम्मीदवार तनवीर हसन के रहने से वोटों में बिखराव होगा.

हमनें सवाल किया अब वे इस बिखराव को कैसे रोकेंगे? कन्हैया ने कहा, “भाजपा विरोधी वोटों में बिखराव की कोई संभावना ही नहीं है. इसका कारण है कि ये गठबंधन चुनाव और पार्टियों का बाद में बना था, उससे पहले जनता ने अपना गठबंधन बनाया था. जहां तक बात राजनीतिक समझ और समीकरणों की है तो हम समझते हैं कि बिहार के पिछले दोनों (विधानसभा और लोकसभा) चुनाव में वोटों का ध्रूवीकरण हुआ था. इस बार भी हमारी समझ से ऐसा ही होगा. महागठबंधन की पार्टी चाहे कोई भी हो, सबका एक ही मकसद है भाजपा को हराना. इसके पहले भी मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला हो या कोई अन्य मसला. हर जगह भाजपा के खिलाफ महागठबंधन के सब लोग एक साथ खड़े हुए हैं.

कन्हैया किसको मानते हैं अपना प्रतिद्वंदी ?

लेकिन सोमवार की सुबह होते-होते राजद और लेफ्ट की यह लड़ाई स्पष्ट होने लगी. खगड़िया से राजद के टिकट की दावेदार पार्टी की महिला चेहरा कृष्णा यादव को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में छह सालों के लिए निलंबित कर दिया गया है. खबर है कि कृष्णा राजद का दामन छोड़ सीपीआई के टिकट पर खगड़िया से बतौर लेफ्ट की उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरेंगी. इसके पहले शनिवार को प्रेस वार्ता में सीपीआई के नेता सत्यनारायण सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया था कि लेफ्ट खगड़िया से भी अपना कैंडिडेट उतारेगा.

गिरिराज सिंह, भाजपा नेता।

कन्हैया आगे कहते हैं, “जहां तक बात बेगूसराय की है तो वहां तनवीर हसन से मेरी लड़ाई ही नहीं है. बेगूसराय की लड़ाई केवल कन्हैया कुमार बनाम गिरिराज सिंह की लड़ाई है.”

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि राजद और लेफ्ट की यह लड़ाई सिर्फ और सिर्फ बेगूसराय सीट को लेकर ही है. दोनों दलों में ज़िरह इस बात पर चल रही है कि यदि महागठबंधन में एक दूसरे का सपोर्ट करना है तो राजद को बेगूसराय से अपना कैंडिडेट वापस लेना होगा. और नहीं तो लेफ्ट पार्टियां खगड़िया समेत अन्य दूसरी सीटों पर भी एकजूट होकर राजद का काम खराब कर सकती हैं.

करीब घंटे भर से अधिक चली प्रेस वार्ता के दौरान कन्हैया कुमार से उनकी और गिरिराज सिंह की जाति (भूमिहार) एक होने के कारण ये सवाल भी पूछा गया कि क्या वे भूमिहार थे, इसलिए उन्हें बेगूसराय से टिकट दिया गया? कन्हैया ने इसका जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने कभी इसके बारे में सोचा ही नहीं. कहते हैं कि मैं आदर्श राजनीति करना चाहता हूं उसमें जाति की कोई अहमियत ही नहीं है.

प्रेस वार्ता में यह भी जानकारी दी गई कि सीपीआई अपने सहयोगी दलों सीपीआई माले और सीपीआई मार्क्सवादी के समर्थन में रहेगी.

इस तरह कन्हैया को मिला दें तो वाम दलों द्वारा अभी तक कुल छह सीटों पर चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा की जा चुकी है. इनमें सीपीआई माले की ओर से चार सीटों आरा, काराकाट, सिवान और जहानाबाद पर लड़ने की घोषणा हुई है, जबकि उजियारपुर से सीपीआई एम के एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाएगा.

आखिर में सवाल फिर से वही रह जाता है कि “अगर सीपीआई महागठबंधन में भाजपा को हराने के लिए है तो बेगूसराय से महागठबंधन ही उसे क्यों हराना चाहता है?”

तनवीर हसन, राजद नेता।

जवाब में भले ही कन्हैया और उनकी पार्टी के लोग ये कहें कि बेगूसराय से महागठबंधन के उम्मीदवार तनवीर हसन मैदान में हैं ही नहीं, मगर सच यही है कि तनवीर राजद के सेकुलर चेहरा हैं. और पिछली बार लोकसभा चुनाव में उन्हें करीब तीन लाख 70 हजार वोट मिले थे. जाहिर है इस सूरत में भाजपा के खिलाफ पड़ने वाले वोटों का समीकरण गड़बड़ा जाएगा. और ऐसे में गिरिराज सिंह के लिए वोटों का ध्रूवीकरण करना आसान हो जाएगा.

DPILLAR