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February 18, 2019
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28 साल के लड़के से डर गए हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार : तेजस्वी यादव

Team dPILLAR: 28 साल के तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता है. पिता लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाला में जेल जाने के बाद भी हालिया उपचुनाव में अपनी पार्टी राजद की शानदार जीत के नायक रहे. जिस तरह उपचुनावों के बाद तेजस्वी यादव उभरकर सामने आए हैं, राजनैतिक चिंतकों को उनमें बिहार का भावी मुख्यमंत्री दिखने लगा है. आगे पढ़िए तेजस्वी यादव से अमरनाथ तिवारी का THE HINDU”  के लिए बातचीत  का हिंदी अनुवाद…

सवाल : अररिया और जहानाबाद के उपचुनाव के नतीजों को आप किस रूप में देखते हैं?

जवाब : अररिया और जहानाबाद दोनो सीटें राजद के पास हमेशा से नहीं रही हैं. कभी हम जीते तो कभी हारे. लेकिन इस बार हमारे उम्मीदवारों ने न सिर्फ दोनों सीटें बचा ली, बल्कि बड़े अंतर से अपने प्रतिद्वंदियों को हरा दिया. दोनो क्षेत्रों में हमारा वोट शेयर भी साथ में बढ़ा है. और यह सब तब हुआ जब भाजपा और आरएसएस अपने सारे कार्यकर्ताओं को सांप्रदायिकता की लाइन पर वोटर्स को पोलराइज करने के लिए लगा दिया था.

हमलोगों को केवल मुस्लिम और यादवों का समर्थन नहीं मिला है, बल्कि समाज के सभी वर्गों ने हमारा साथ दिया है. यहां तक कि सूबे के ब्राम्हणों का भी हमें सपोर्ट मिला. अररिया लोकसभा सीट के लिए तो हमलोग उसी समय निश्चित हो गए थे जब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने एक जनसभा में ये कह दिया कि अगर अररिया में राजद उम्मीदवार चुनाव जीत गया तो अररिया आतंक का केंद्र बन जाएगा.

सवाल : उपचुनाव की नतीजों से कैसा मैसेज गया?

जवाब : इसे केवल उपचुनान के नतीजों के आधार पर ही नहीं देखा जाना चाहिए. इसे आप जनता के बदले मूड के रूप में देखिए. केवल बिहार ही नहीं. उत्तर प्रदेश में भी. इससे बीजेपी को ये संदेश गया गया है कि आप एक बार कुछ लोगों को मुर्ख बना सकते हैं, बार-बार सभी लोगों को मुर्ख नहीं बनाया जा सकता. लेकिन फिर भी मैं इतना जरूर कहूंगा कि हमलोग उपचुनाव के नतीजों से संतुष्ट नहीं हैं, हमें और काम करना होगा. जल्दी ही हमलोग 2019 के चुनाव के लिए अपनी रणनीति सामने लाएंगे.

सवाल : उपचुनाव में आपके पक्ष में क्या रहा?

जवाब : इसमें केवल एक ही बात नहीं है. पहला तो कि लोग ये समझ रहे हैं कि लालु प्रसाद को गलत नियत से चारा घोटाला के केसों में फंसा कर जेल भेजा गया है. ये भाजपा और नीतीश कुमार की एक साजिश है. दूसरा बालू खनन पर रोक लागाना है. इससे बिहार के लाखों गरीब परिवारों को नुकसान हुआ है. तीसरा विचित्र तरह का शराबबंदी कानून है.

लाखों गरीबों को जेल भेजा गया है. चौथी बात ये कि उत्तर बिहार के लोग अभी भी बाढ़ की त्रासदी झेल रहे हैं. 19 बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लाखों पीड़ितों तक रिलिफ पैकेज नहीं गया. और सबसे आखिर में बिहार को विशेष राज्य का पैकेज नहीं दिला पाना. जबकि अभी सरकार में नीतीश कुमार भाजपा के ही साथ हैं जिसे स्पेशल पैकेज देना है.

सवाल : पिता की गैरमौजूदगी में महागठबंधन का टूट जाना और फिर अभी की परिस्थितियां. कैसे संभाल रहे हैं सब?

जवाब : मुझे याद है कि किस तरह मेरी मां राबड़ी देवी ने 1997 में लालूजी के पहली बार जेल जाने पर नौ बच्चों के उस परिवार को संभाला था. साथ में सरकार भी चलाई थी. कोई भी कल्पना कर सकता है कि उनके लिए वो वक्त कितना मुश्किल रहा होगा. और कुछ इसी तरह की परिस्थिततियां पिता की गैरमौजदूगी में मेरे सामने हैं. लेकिन इस मामले में मैं अपनी मां से प्रेरणा लेता हूं. और मैं अपने चाचा नीतीश कुमार जी का धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मेरे जीवन में ऐसी चुनौतियों से लड़ने का मौका दिया.

सवाल : बिहार के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में आप मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कहां देखते हैं?

जवाब : नीतीश कुमार को आत्मसमीक्षा करनी होगी. वो हमेशा कहते हैं कि विकास की राजनीति करते हैं. लेकिन जहानाबाद में क्या हुआ, पटना से मात्र 100 किमी दूर है, जहां कि उनकी पार्टी के उम्मीदवार बड़े अंतर से हार गए. 2019-20 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव राजद और भाजपा के बीच लड़ा जाएगा.

क्योंकि नीतीश कुमार की पार्टी की कोई हैसियत नहीं रह जाएगी. नीतीश कुमार के ये कहना कि, उन्होंने बिहार के लिए महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ हाथ मिलाया था, बिहार की जनता ने सिरे से खारिज कर दिया है. भाजपा उनको अपनी जरूरत के हिसाब से स्टेपनी (पिट्ठु का बैल) की तरह इस्तेमाल करेगी.

सवाल : ऐसा क्यों हो गया है कि अचानक से भाजपा के नेता विवादित बयान देने लगे हैं? जबकि नीतीश कुमार के साथ गठबंधन की सरकार में भी हैं.

जवाब : आप देखिए. ये शुरु से बीजेपी का एजेंडा रहा है. जब उनको ये अहसास हो गया कि वे अकेले दम पर नहीं जीत पाएंगे, वो वोटर्स को पोलराइज करने के लिए सांप्रदायिक उन्माद फैलाने का काम कर कर रहे हैं. आपने देखा होगा कि उपचुनाव में बुरी तरह हारने के बाद कुछ बीजेपी नेता, जो कि केंद्रीय मंत्री के पदों पर भी हैं अररिया, भागलपुर और दरभंगा में सांप्रदायिक तनाव फैलाने का काम कर रहे थे.

लेकिन लोग यहां उतने भी बुद्धु नहीं हैं कि उनके इस डिजाइन के नहीं समझे. 2019 का चुनाव आने दीजिए. बीजेपी का सारा एजेंडा फेल हो जाएगा. आखिर कितने दिनों तक बांटने की राजनीति चलती रहेगी.

सवाल : कैंब्रिज एनालिटिका विवाद पर आपकी क्या राय है?

जवाब : देखिए, देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एकमात्र ऐसे राजनेता हैं जो कैंब्रिज एनालिटिका जैसी पीआर एजेंसियों की मदद चुनाव लड़ने के लिए लेते हैं. ऐसा करके वे एक हाइप बनाते हैं जिससे अपने वादों और विकास के कामों पर पर्दा डाल सकें. अगर के सी त्यागी के बेटे इन सबमें शामिल हैं तो वह कैमरे के सामने आकर देश की जनता को ये सब क्यों नहीं बता रहे हैं.

सवाल : क्या 2019 के आम चुनाव में महागठबंधन के नेता के तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आगे किया जाएगा? महागठबंधन का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवा कौन होगा?

जवाब : कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है. और सांसदों की संख्या में सबसे बड़ी भी. अगर महागठबंधन की बाकी पार्टियां भी कांग्रेस अध्यक्ष के साथ आएंगी तो राजद को भी कोई दिक्कत नहीं है. जहां तक महागठबंधन के प्रधानमंत्री उम्मीदवार की बात है तो मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी चुनाव से पहले इसका ऐलान नहीं करेगी. जब परिस्थितियां ऐसी आएंगी तो गठबंधन के सभी भागीदार मिलकर सहमति से इस पर निर्णय लेंगे.

सवाल : क्या आपको लगता है कि बीजेपी आपके परिवार के सभी लोगों को भ्रष्टाचार में फंसा कर परेशान कर रही है? हां. आपको कोई संदेह है क्या?

जवाब : वे लालू प्रसाद से डर गए हैं कि वे सारी विपक्षी पार्टियों को बीजेपी के खिलाफ जोड़ लेंगे और बिहार में नीतीश कुमार मुझसे डर गए हैं एक 28 साल का लड़का ऐसा कैसे कर सकता है. मेरा परिवार आज को कुछ भी झेल रहा है, वास्तव में उसके लिए जिम्मेदार नीतीश कुमार हैं.

लालू प्रसाद के राजनैतिक जनाधार से डर के ये लोग उन्हें खत्म करने में जुट गए रहैं. मुझे अपने पिता के जीवन को लेकर खतरा है. लेकिन मैं उन्हें यह याद दिला दिने चाहता हूं हम लोग जितनी अधिक चुनौतियों से लड़ेंगे, उतने ही मजबूत बनते चले जाएंगे.

सवाल : नीतीश कुमार को क्यो जरूरत पड़ी कि आप पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर महागठबंधन से अलग हो गए? जबकि सरकार चला रहे थे, और मुख्यमंत्री भी थे..

जवाब : सत्ता का मोह और खोने का डर. इससे अधिक क्या ही कहा जा सकता है. ऐसा लगता है जैसे वो बिहार के सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का वर्ल्ड रिकार्ड बनाना चाहते हैं मगर मेरी जनता ने जिस तरह से हमें अपना समर्थन दिया है, उससे भयभीत हो गए हैं. और शायद बीजेपी से भी डर गए कि उन्हें ब्लैकमेल कोई राजनैतिक चाल न चल दे. और फिर उन्हें बीजेपी के आगे झुकना पड़े. नीतीश कुमार बिना सत्ता के रह ही नहीं सकते हैं. जबकि उनका कोई जन समर्थन नहीं है. वो अपनी सत्ता यही सब साजिश और जोड़-तोड़ कर बचाए हुए हैं.

 

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