क्या मुखिया करा सकता है पत्रकारों की हत्या

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Team dPILLAR:  रविवार को आरा में हुए पत्रकार की हत्या, जेएनयू के छात्रों के पैदल मार्च के दौरान महिला पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस की बदसलूकी और आदिवासी क्षेत्रों में पत्रकारों के साथ पुलिसिया व्यवहार, यह बताने के लिए काफी है कि भारत प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में 2017 में जारी आंकड़े के अनुसार 180 देशों के समूह में 133वें स्थान पर क्यों आता है. अफ़ग़ानिस्तान और नेपाल जैसे पड़ोसी देश भी इस रैंकिंग में भारत से अच्छी स्थिति में  हैं.

आरा में हुए पत्रकारों की हत्या प्रेस की आवाज को दबाने की एक निर्मम कृत्य के रूप में देखा जा रहा है. दैनिक भास्कर ने सोमवार के अंक में अपने पत्रकार की हत्या की खबर को पहले पन्ने पर जगह दी है. भास्कर स्थानीय लोगों के हवाले से लिखता है कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि एक हत्या है. रिपोर्ट के अनुसार स्कॉर्पियो में गड़हनी का पूर्व मुखिया हरसू अपने बेटे के साथ था.

घटना तब घटी जब दैनिक भास्कर के पत्रकार नवीन निश्चल और उनके साथी विजय सिंह रामनवमी जुलूस को कवर करने के बाद घर लौट रहे थे. उसी दौरान स्कॉर्पियो ने कुचल कर मारा डाला. विजय भी एक पत्रिका के लिए लिखते थे.

रिपोर्ट के अनुसार रविवार शाम को ही हरसू व नवीन के बीच गड़हनी बाजार में कुछ विवाद हुआ था. इसके बाद पूर्व मुखिया ने नवीन को अंजाम भुगतने की धमकी दी थी. रिपोर्ट में दिये एसपी अवकाश कुमार के बयान के अनुसार हरसू के घर पुलिस भेजी गई थी. लेकिन वह अपने बेटे के साथ फरार है. वहीं सूत्रों के अनुसार यह बात भी सामने आ रही है कि पूर्व मुखिया का बेटा पीरो दंगा का आरोपी है और हाल ही में जेल से छुटा है.

आपको बता दें कि सितंबर 2016 में सीवान के पत्रकार राज देव रंजन हत्याकांड पर भी पत्रकारों के समूह ने पुरजोर विरोध किया था. राज देव हत्याकांड के संबंध में 22 मार्च को ही सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला आया है.  हत्यारों के साथ बिहार के पूर्व स्वास्थय मंत्री तेज प्रताप यादव के तस्वीर को आधार बनाकर केस किया गया था. लेकिन सीबीआई की तरफ से क्लिन चीट मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी 22 मार्च 2018 को पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड मामले में कहा है कि तेज प्रताप यादव द्वारा कोई आपराधिक कार्य सामने नहीं आया है.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब तेज प्रताप यादव का आरोपी मोहम्मद कैफ और जावेद के साथ फोटो पर किसी तरह की कार्यवाई नहीं होगी. इसी के साथ सीबीआई की क्लिन चीट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई बंद कर दी.

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