#HappyBirthdayBIHAR: व्यवस्था से हम निलहे बन जाते हैं, व्यवस्था के लिए जयप्रकाश भी

आज की ख़बर खिड़की के पार

Team dPILLAR: नमस्कार. आज 22 मार्च है. यानी आज बिहार दिवस है. अंग्रेजी हुकूमत ने 1905 में पहले बंगाल को हमसे अलग किया, फिर 1912 आते-आते उड़ीसा भी हमसे अलग होकर अलग राज्य बन गया. इस तरह आज बिहार 106 साल का हो गया.  चलिए मिलकर कहते हैं अपने प्रदेश को “हैप्पी बर्थडे बिहार”. 

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आगे पढ़िए कपिन्द्र किशोर भारद्वाज की खिड़की के पार से अपने बिहार की गाथा.

 उम्मीद की फसल है, विश्वास की पतवार है. बढ़ रहा है आगे, ये बदलता बिहार है.

 

इतिहास गवाह है. हमने देश को क्या क्या दिया. बदलते संस्कृति और सभ्यता को नई परंपराओं से अवगत कराया है. हमारा इतिहास आज पूरे देश के इतिहास पर भारी है. जी हाँ हम यूं ही नहीं कहते हम बिहारी हैं.

हम आज जहाँ खड़े हैं, वो अपने आप में एक उपलब्धि है. तमाम आपदाओं, विपदाओं और आर्थिक मजबूरियों के बाद भी हम आज देश के हर कोने में अपना झंडा बुलंद किए हुए हैं. हम देश में सबसे अशिक्षित कहें जाते हैं, पर सबसे अधिक नौकरियां भी हम ही पाते है. आज बिहार दिवस है और मैं बिहारी, तो सोचा कि अपने क्षेत्र और लोगों के प्रति दूसरे क्षेत्र के लोगों के मन में पल रही कुंठा को थोडी दूर करूं.

 वर्तमान के बदलते परिवेश और संस्कृति में हम बिहारी थोड़ा पीछे रह जाते हैं. क्योंकि  हम दिल से सोचते हैं. हमारी सहनशीलता और संस्कार हमें आगे बढ़ने नहीं देते. हम वहां जा कर ठहर जाते हैं, जहां लोग बाजारवाद को अपनी संस्कृति मान बैठे हैं, पर हम इन बंधनों में रह कर भी निरंतर आगे बढ़ते रहते हैं और अपनी अलग पहचान बनाते हैं. हम देश की राजनीति को नई दिशा देते हैं. पर दुख होता है जब आप कहते हैं कि ये तो बिहारी है.

जनाब आप क्यों भूल जाते हैं कि हम उसी बिहार के हैं जिसने देश को राष्ट्रीय प्रतीक दिया. आजाद भारत को पहला राष्ट्रपति दिया. हमारी ही धरती पर गुरू गोविंद सिंह ने जन्म लिया. भगवान महावीर ने जन्म लिया. इसी धरती पर बुद्ध को बोधिसत्व की प्राप्ती हुई. हम वही बिहारी हैं जो महात्मा गांधी को भी अपनाते हैं. चंद्रशेखर आजाद को भी. जब देश पर कोई भी विपदा आती है तो उसका सामना करने के लिए हमारे बुजुर्ग बाबू कुवंर सिंह बन कर तलवार उठाते हैं और बिरसा मुंडा बन कर धनुष.

हमें शिक्षा के लिए दूसरों राज्यों पर निर्भर रहना पडता है पर देश में सबसे अधिक अधिकारी भी हम ही बनाते हैं. हम दूसरों के सम्मान के लिए काल चक्र और प्रकाश उत्सवों का आयोजन भी करते हैं. आपसी वर्चस्व में सेनारी और बाथे जैसे नरसंहार भी. हमारे यहां व्यवस्था बहाल करने के लिऐ लोग निलहे भी बन जाते हैं और व्य्वस्था परिवर्तन के लिऐ लोक नायक जय प्रकाश नारायण भी.

यह अलग बात है कि तालाब की एक सड़ी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है. लोग हमें अशिक्षित, बीमारू और बेकार समझ लेते हैं.

पर जनाब हमारी ही मेहनत और पसीने की सिंचाई से पंजाब के खेत लहलहाते है. दिल्ली, मुबंई, कलकता और बेंगलुरू जैसै शहरों की जरूरतें पूरी होती हैं. कारोबार चलता है. हम असम और महाराष्ट्र में मारे भी जाते हैं. पर हम किसी पर कभी प्रांतीयता को लेकर प्रहार नहीं करते. हम हर साल प्राकृतिक आपदाएं झेलतें हैं. फिर भी कभी इस समस्या से आजिज आकर आत्महत्याएं नहीं करते. देश को एक से बढ़कर एक नेता देते हैं, पर देश में सबसे बदहाल व्यवस्था में हम ही रहते हैं. क्योंकि हमें पता है कि जब हम ठान लेते है तो पहाड़ काट कर अपनों के लिए रास्ता बना देते हैं.

हम देश के हर बदलाव की शुरुआत  करते हैं, क्योंकि हमें अपने आप अपनी माटी और अपनी संस्कृति पर भरोसा है. आज हम यूं ही नहीं सब पर भारी है.

 

जी हां हम बिहारी हैं…

DPILLAR