#LetterToMyPM आपके नारों को हमने ऐसे अपना लिया, जैसे स्कूल में याद की गई प्रार्थना

आज की ख़बर खिड़की के पार

Team dPILLAR : दिल्ली के लोधी रोड में सीजीए कॉम्प्लेक्स के बाहर पिछले तीन हफ्ते से सैकड़ों छात्र SSC की परीक्षाओं में धांधली की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI से कराने के लिए धरना दे रहे हैं. हाल ही में संपन्न उत्तर प्रदेश की बोर्ड परीक्षाओं में करीब 10 लाख परीक्षार्थी शामिल ही नहीं हुए. ताजा हाल ये है कि इस साल की शुरुआत से लेकर अभी तक भारत में जितनी भी प्रतियोगी परीक्षाएं हुई हैं, उनमें ऐसी कोई भी परीक्षा नहीं है जिसके पेपरलीक की खबरें अखबारों में नहीं छपीं. देश का कोई ऐसा शहर नहीं रहा जिसमें छात्रों ने परीक्षाओं में धांधली को लेकर प्रदर्शन नहीं किया.

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लेकिन, हैरत की बात ये है कि देशभर के बेरोजगार युवाओं की मांग पर  प्रधानमंत्री ने चुप्पी साध रखी है. शायद इसलिए क्योंकि सरकारी आंकड़ो (ILO और श्रम मंत्रालय) के अनुसार भारत में 2016-17 तक 12 करोड़ बेरोजगार हो गए थे. एक दिन में 550 नौकरियां खत्म हो रही हैं.

जबकि नरेंद्र मोदी ने 2014 लोकसभा चुनावों की कैंपेनिंग के दौरान आगरा की एक चुनावी सभा में मंच से ये ऐलान किया था, कि यदि उनकी सरकार बन गई तो एक करोड़ युवाओं को रोजगार देंगे. उस समय के मन की बात अभी उनके मन में नहीं आ रही है शायद. क्योंकि एक करोड़ के वादा 1.35 लाख रोजगार मिलने की हकीकत के सामने टूट गया.

PHOTO/GOOGLE

dPILLAR पर आगे पढ़िए प्रशांत तिवारी की “खिड़की के पार” से उन्हीं के “मन की बात”

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

गोरखपुर और फूलपुर के चुनाव के रिजल्ट ने बता दिया की 2019 में साहब आप जीत सकते हैं. और जीतना भी चाहिए. ज़रूरत भी हैं आपकी इस देश को.

इसलिए उत्तर प्रदेश जैसे राज्य ने आपको सबसे ज़्यादा सीट दी. विधानसभा चुनाव में भी आपका साथ दिया. पर आप और आपके मंत्री पिछली सरकार की खामियों को गिनाने में इतने मशगूल हो गए की कब 4 साल बीत गए पता ही नहीं चल पाया.

दरअसल आप पर हमने विश्वास किया. लाइन में खड़े रह कर नोटबंदी सही. GST पर भी आपका साथ दिया. सोचा कि आप बदलाव की राजनीति कर रहे हैं. तो क्यों ना हम खुद को बदलें और आपके द्वारा दिए गए स्वच्छता के मंत्र को भी बड़े शिद्दत से स्वीकार किया.

आज हम सभी ना तो खुद कूड़ा कही फेंकते हैं ना ही किसी और को फेंकने देते हैं. आपके दिए गए नारों को हमने ऐसे अपनाया जैसे स्कूलों में याद की गई प्रार्थना. सबका साथ , सबका विकास में हमने साथ तो दे दिया पर आपने विकास को अपंग बना दिया.

आप और आपके नेता बोलेंगे की विकास हो रहा हैं. मैं कहूंगा कि जब मैं सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए जाता हूँ तो वहां क्या मिलता हैं. गोरखपुर अस्पताल वाला खौफ. अब हम और हमारे जैसे लोग अपने मासूम बच्चों को सरकारी अस्पताल ले जाने से डरते हैं. प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने से डरते हैं.

अभी हाल में हुए नक़ल विहीन  बोर्ड परीक्षा में 10 लाख बच्चे शामिल नहीं हुए. आपके पार्टी के लोग सीना तान कर बयान दे रहे थे कि योगी जी की कड़ाई की वजह से नक़ल करने वाले परीक्षा देने आये ही नहीं. दरअसल ये बड़े शर्मिंदगी की बात हैं और देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल हैं कि हम आज जहां विकास, स्किल डेवलपमेन्ट, मेक इन इंडिया जैसे बड़े कैंपेन चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ युवाओं कि इतनी तादाद परीक्षा सिर्फ इसलिये छोड़ दे रही हैं क्योंकि उसे नक़ल करने को नहीं मिला.

बड़े शर्म कि बात हैं कि इतनी योजनाओं के बावजूद हम अपने देश के युवाओं को एक बेहतर स्कूल तक नहीं दे पा रहे हैं.
आपके स्किल डेवलपमेंट के ट्रेनिंग सेंटर में बड़ा घोटाला चल रहा हैं. वहां भी बच्चे नक़ल से पास करवाए जा रहे हैं. ताकि अपना बजट पास करा लिया जाए. इसमें आपके स्किल डेवलपमेंट से जुड़े अधिकारी से लेकर सेंटर इंचार्ज और एग्जामिनर तक शामिल हैं.

प्रतियोगी छात्र परीक्षाओं को सही तरह से कराने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. और आपने CBI जांच के मौखिक आदेश भी दिए. सवाल आपके जांच पर नहीं हैं. क्योंकि हम सभी को पता हैं उसे ख़त्म होने में कई साल लग जाएंगे.

बड़ा सवाल ये हैं कि प्रतियोगी छात्रों का जो सिर्फ सरकारी नौकरी के लिए जी जान लगाकर मेहनत कर रहे हैं, क्या उनके साथ न्याय हो पायेगा. यही है शायद गांधी जी के सपनों के भारत कि बुनियादी हकीकत.

अगर विकास के नाम पर 4 सालों में प्राथमिक विद्यालय नहीं सुधर पाए तो आप ही बताइये की क्या बेहतर हुआ है. बस आप इतना बता दीजिये की रोजगार के नाम पर कितनी सरकारी नियुक्तियां हुई हैं.

वो पकौड़े वाले रोजगार को प्लीज मत काउंट करियेगा. यह आखिरी रास्ता हैं उन प्रतियोगी छात्रों के लिए जो शायद भ्रष्टाचार की वजह से नौकरी हासिल ना कर पाएं. और ओवरऐज होने की वजह से कम्पटीशन से बाहर कर दिए गए या जाएंगे.

बहुत सी बाते हैं लिखने को लेकिन मै बुनियादी बातों का ज़िक्र सिर्फ इसलिये कर रहा हूँ ताकि आप जान सकें कि एक आम हिंदुस्तानी को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. और आपको तो इस बात का एहसास अच्छी तरह से है की बड़े व्यापारी लोग पैसा तो खूब बहा सकते हैं,

पर वोट तो हिंदुस्तान की जनता ही देती हैं और वही तय करती हैं की आगे उसे क्या करना हैं. उसने गोरखपुर, फूलपुर उपचुनाव में दिखा दिया कि अभी भी वक़्त है संभल जाइये वरना तख्तापलट करने में एक साल बचा है.

संभल जाइये विदेश के साथ देश की बुनियादी समस्याओं की ज़मीनी यात्रा करिये. सिर्फ एक साल है शायद. इज्जत और आपका सम्मान बच जाए. वरना इस महागठबंधन की सुनामी से खुद को बचाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा होता दिखाई दे रहा है.

आपका,

प्रशांत तिवारी,

पत्रकार.

नोट – ये “मन की बात” है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की नहीं. उसकी, जिसके वो खुद प्रधानसेवक हैं. मीडिया केवल प्रधानमंत्री के “मन की बात” बताने और सुनाने के लिए नहीं है. हमारी असल जिम्मेदारी आपके “मन की बात” उन (प्रधानमंत्री) तक पहुंचाने की है. आप भी अपने मन की बात हमें बताएं. हमारा पता है-  “dpillarnews@gmail.com

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