चौथी बार दोषी हुए लालू, जब पहली बार कटघरे में अंजनी कुमार होंगे तब क्या होगा!

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Team dPILLAR:  बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चर्चित चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में चौथी बार दोषी करार दिया गया है. रांची की विशेष CBI कोर्ट के जज शिवपाल सिंह ने दुमका कोषागार से अवैध निकासी के एक मामले में सुनवाई करते हुए लालू समेत 19 लोगों को दोषी माना है, जबकि अन्य 12 आरोपियों को इस मामले से बरी कर दिया.

चारा घोटाला के एक मामले में CBI कोर्ट पेशी के लिए जाते लालू, PHOTO/DPILLAR

लालू प्रसाद यादव को इसके पहले भी तीन बार अलग-अलग मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है. जज शिवपाल सिंह की अदालत अगले 21 मार्च से एक बार फिर से लालू समेत अन्य सभी आरोपियों की सजा के बिंदुओं पर सुनवाई शुरु करेगी. लेकिन इन सबके बीच जो खबर सबसे अहम है वो ये कि चारा घोटाले में दो ऐसे ब्यूरोक्रैट्स का नाम जुड़े हैं जो अब भी पदसोपान के क्रम में शीर्ष पर बने हुए हैं.

बात कर रहे हैं बिहार के वर्तमान मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह और सीबीआई के एसएसपी ए के झा की. क्योंकि 12 मार्च को सीबीआई के विशेष अदालत के जज शिवपाल सिंह ने चारा घोटाले में दो ऐसे नामों को शामिल करने का आदेश दिया जिसके बाद से चारा घोटाले की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होने शुरु हो गए हैं.

विशेष आदालत ने चारा घोटाले में दुमका कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित एक मामले में बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह व सीबीआई के एएसपी एके झा समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया है.

मामला 45 A 96 है. आरोप है कि तत्कालीन पशुपालन क्षेत्रीय निदेशक डॉ शेष मुनिराम के नेतृत्व में अफसरों और आपुर्तिकर्ताओं की मिलीभगत से दुमका कोषागार से 17 करोड़ 73 लाख 32561 रुपये की अवैध निकासी की गई. यह निकासी साल 1991 से 1992 और 1995 से 96 के बीच हुई.

इससे पहले मुकदमा संख्या 38 A 96 में भी अंजनी कुमार सिंह और अजय कुमार झा को आरोपी बनाया गया था. इस मामले में दुमका कोषागार से केवल दो महीने दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 में तीन करोण 13 लाख की अवैध निकासी का आरोप है.

जज शिवपाल सिंह के आदेशानुसार “बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह 1991-92 में दुमका के उपायुक्त थे. उस समय उन्होंने यह आदेश जारी किया था कि कोषागार से एक लाख रुपये से अधिक की निकासी नहीं होगी.

 

आपूर्तिकर्ताओं ने उसका फायदा उठाया. कोई सवाल नहीं उठाए, इसलिए एक लाख रुपये से कम के बिल की निकासी करने लगे. इस बात की जानकारी रहते हुए भी DDC अंजनी कुमार सिंह ने अवैध निकासी पर कोई रोक नहीं लगाई. और ये सब जानने के बावजूद भी सीबीआई ने उन्हें आरोपी नहीं बनाया.”

अदालत ने सीबीआई के एएसपी अजय कुमार झा (तत्कालीन सीबीआई इंस्पेक्टर) के बारे में कहा कि इन्होने सही जांच नहीं की. डीसी कोषागार के प्रभारी होते हैं. घोटाला उजागर होने के बाद भी इन्होंने डीसी को अभियुक्त नहीं बनाया. जांच में पाया गया कि शिव पटवारी , नरेश प्रसाद द्वारा षडयंत्र के तहत राशि का गबन किया गया. बावजूद इन लोगों को सरकारी गवाह बनाया गया.

मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह को एक्सटेंशन पर रखा है राज्य सरकार ने, PHOTO/GOOGLE

आपको बता दें कि अंजनी कुमार सिंह 1981 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. 2014 में आठ सीनियर अधिकारियों को दरकिनार कर मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपना मुख्य सचिव बनाया था. तब से लेकर आज तक अंजनी कुमार बिहार सरकार के चहेते बने हुए हैं. वर्तमान बिहार सरकार ने तो इन्हें एक्सटेंशन पर रखा है.

यानी नौकरशाही के नियमों के मुताबिक किसी कर्मचारी को सेवा-निवृत्ति की उम्र बीत जाने के बाद भी बनाए रखना.

पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह भी खुद ये मान चुके हैं कि निकासी के लिए जिम्मेदार कोषागार पदाधिकारी थे.  बकौल सिंह,

“एकीकृत बिहार में सबसे पहले पशुपालन घोटाले में मैंने ही दुमका में अवैध निकासी को लेकर दो टीमें गठित की. उस टीम ने दो केस भी दायर किए. उपायुक्त को कोषागार के विपत्र पारित करने के संबंध में अलग कोई अधिकार नहीं होता. हमने केवल यह आदेश दिया था कि एक लाख से अधिक के विपत्र को नियमानुसार पारित करें. अगर नियम का उल्लंघन हुआ है तो कोषागार पदाधिकारी जिम्मेदार होंगे. “

 

चारा घोटाले को उजागर करने वाले पहले कुछ चुनिन्दा नौकरशाहों में से एक डॉ. धर्मेन्द्र सिन्हा जो कि अभी भारतीय पशु चिकित्सा संघ के महासचिव हैं ने dPILLAR  से  कहा-

“उस वक्त के  नौकरशाहों ने मामले को और बिगड़ने का मौका देने की भारी भूल की. एक नहीं, कई अधिकारी शामिल थे. और सारे के सारे दोषियों के दलाल थे. जांच प्रक्रिया का हिस्सा भी खुद ही रहे, इसलिए कइयों के नाम अब तक लिस्ट में शामिल नहीं हैं”

बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह और सीबीआई के एएसपी ए के झा के खिलाफ दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले की अगली सुनवाई की तिथि अदालत ने 12 अप्रैल सुनिश्चित की है.

 

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