#SSCSCAM: कौन उकसा रहा है अहिंसा की राह पर चल रहे छात्रों को  

#SSCscam आज की ख़बर

Team dPILLAR:  कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाओं में धांधली की जांच CBI से कराने की मांग कर रहे छात्रों को पटना के गांधी मैदान में धरना देते हुए शुक्रवार को 12 दिन हो चुके हैं. इन 12 दिनों में ऐसा कोई दिन नहीं रहा जिस दिन छात्र गांधी मूर्ति के पास आकर WE WANT JUSTICE और SSC मुर्दाबाद के नारे नहीं लगाए.

मगर आज 12वें दिन जब छात्र रोज की तरह हाथों में बैनर-तख्तियां लेकर SSC के खिलाफ नारे लगा रहे थे, तब पटना पुलिस उनपर दबिश दिखाने लगी.

शुक्रवार को गांधी मैदान के चारो ओर पटना पुलिस के वज्र वाहन से लेकर बड़ी-बडी बैरकबंद गाड़ियां खड़ी दिखीं. किसी भी स्थिति से निपटने के लिए स्पेशल टुकडियां भी बुलाई गई थीं. गांधी मैदान के एक गेट को छोड़कर बाकी गेट आम लोगों के लिए बंद कर दिए गए थे. हर गेट पर पुलिस बल की भारी मुस्तैदी ये बता रहा था कि पुलिस को 12 वें दिन छात्रों के विशाल हुजूम आने की भनक पहले ही मिल गई थी. वरना आंदोलन में छात्रों की इतनी संख्या आंदोलन के दूसरे-तीसरे दिन भी आ चुकी थी. मगर उस दिन पुलिस का पहरा नहीं था.

पटना पुलिस की सूत्रों की मानें तो “उन्हें इस बात की पहले ही सूचना दे दी गई थी कि शुक्रवार को गांधी मैदान में बड़ी संख्या में छात्र इकट्ठा होने वाले हैं. जब छात्र इकट्ठा हो जाएंगे तो रोज की तरह गांधी मुर्ति के पास ही प्रदर्शन नहीं करेंगे, बल्कि करगिल चौक की ओर भी बढ़ेंगे.”

हुआ भी ऐसा ही. दोपहर तक गांधी मैदान में हजारों छात्र जमा हो गए थे. SSC मुर्दाबाद और WE WANT JUSTICE के नारे आसमान में गुंज रहे थे, तभी किसी ने (एक कोचिंग संचालक)  छात्रों के हाथ से माइक लेकर अपना संबोधन शुरु कर दिया. चुंकि छात्रों का शोर था, इसलिए जो माइक से दूर खड़े थे, उन्हें स्पष्ट सुनाई नहीं दे रहा था.

गांधी मैदान में आज छात्रों की संख्या करीब 10 हजार थी, PHOTO/DPILLAR

मगर जो दिख रहा था वो साफ बता रहा था कि गांधी मुर्ति के पास जो छात्र पिछले 11 दिन से अहिंसा के राह पर चलकर अपने आंदोलन को मजबूत बनाने में लगे थे, उन्हीं में से कुछ छात्रों का एक समूह सड़क पर उतर कर हिंसक रास्ता अख्तियार कर लिया. ट्रैफिक रोक दिया गया, गाड़ियों के शीशे फोड़े गए.

गांधी मैदान के पास लगी पटना पुलिस की बख्तरबंद गाड़िया, PHOTO/DPILLAR

क्योंकि शुक्रवार को करगिल चौक पर हुई पुलिस के साथ झड़प में केवल दारोगा भर्ती परीक्षा में पेपरलीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र नहीं थे, बल्कि SSC के खिलाफ आंदोलन में शामिल छात्र भी थे. उनके हाथों में तख्तियां और बैनर ये बताने के लिए काफी थे.

ऐसे में सवाल ये है कि आखिर अहिंसक विरोध कर रहे छात्रों को उग्र होने के लिए उकसा कौन रहा है? इसका जवाब देता है शुक्रवार को आंदोलन स्थल यानी गांधी मुर्ति (गांधी मैदान) के पास कारों का जत्था. क्या अपनी नौकरी की मांग कर रहे बेरोजगार छात्र कारों में बैठकर तो प्रदर्शन करने नहीं आएंगे.

ये छात्र कार से चलकर आंदोलन करने आए थे क्या? गांधी मैदान में लगी कारें. PHOTO/DPILLAR

आपको बता दें कि आंदोलन करने के लिए आई उन कारों में शहर के कोचिंग संचालक थे. वही कोचिंग संचालक जो छात्रों को संबोधित भी कर रहे थे. तो क्या कोचिंग संचालक ही छात्रों के इस आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं? और उन्हें उग्र होने के लिए उकसा रहे हैं!

कोचिंग संचालकों पर उठता सवाल इसलिए भी वाजिब  है, क्योंकि यदि SSC के खिलाफ आंदोलन में वो छात्रों को अपने पक्ष में नहीं खीचेंगे तो कल को जब ये आंदोलन खत्म होगा तो उनके पास पढ़ने कौन जाएगा !

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सवाल ये भी है कि “क्या ये कोचिंग संचालक सरकार और SSC की तरफ से किसी एजेंडे के साथ तो नहीं आए हैं!” क्योंकि ऐसा भी हो सकता है कि पुलिस और प्रशासन आंदोलनकारी छात्रों को हिंसक भीड़ का नाम देकर आंदोलन का दमन कर दे. ताकी आगे भी इसी तरह SSC की परीक्षाओं में धांधली चलती रहे और धांधलेबाज मालामाल होते रहें !

 

 

DPILLAR