BJP को किस ओर ले जाएगा ये अतिआत्मविश्वास !

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नीरज प्रियदर्शी :

“जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है.”

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की लिखी ये पंक्ति “कृष्ण की चेतावनी” कविता से ली गई है.

कहते हैं कि उत्तर प्रदेश लोकसभा उपचुनाव का उम्मीदवार चुनने के दौरान ही मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को स्पष्ट कह दिया था कि

“गोरखपुर की सीट तभी बचाई जा सकती है जब गोरखनाथ पीठ के ही किसी प्रतिनिधि को चुनाव में खड़ा किया जाए”.

मगर भारतीय जनता पार्टी के थिंक टैंक ने आदित्यनाथ की बात की परवाह ना करते हुए स्थानीय जिला इकाई के मंत्री उपेन्द्र नाथ शुक्ला को अपना उम्मीदवार बना लिया. चुनाव के नतीजे अब सामने हैं. जिस गोरखपुर लोकसभा सीट पर पिछले 30 सालों से भाजपा कभी नहीं हारी, उसी सीट पर इतिहास में पहली बार करीब 22 हजार वोटों के भारी अंतर से अपनी सीट गंवा दी”.

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उपचुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ये बयान कि “हम इस गठबंधन को समझने में फेल रहे. इसका एक कारण अतिआत्मविश्वास भी है. इससे सबक लेना चाहिए”, साफ दर्शाता है कि भाजपा ने गोरखपुर को अपना अजेय दुर्ग मान लिया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह त्रिपुरा में मिली जीत के नशे में थे शायद, तभी तो गोरखपुर में एक चुनावी सभा तक नहीं की. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई सीट पर पार्टी का विवेक खो सा गया था, तभी तो योगी के कद कोई उम्मीदवार नहीं ढूंढ सकी.

ठीक ऐसा ही हाल फूलपुर के उपचुनाव का रहा. जहां प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के डिप्टी सीएम बनने के बाद खाली हुई सीट पर नागेंन्द सिंह पटेल बुरी तरह हार गए. भाजपा यहां भी इतिहास में पहली बार 59,000 मतों के भारी अंतर से हारी है. 2014 के लोकसभा चुनावों में केशव प्रसाद मौर्य ने इसी सीट पर इससे अधिक वोटों से जीत हासिल की थी.

BBC हिंदी पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार “फूलपुर उपचुनाव में केशव प्रसाद मौर्य अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाना चाहते थे”. कई बार खबरों में ये बात आ भी चुकी है. मगर यहां भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने मौर्य की बात को कोई भाव नहीं दिया. नागेंन्द्र सिंह पटेल जैसे हवाई कैंडीडेट को चुनाव में उतारना इसकी बानगी पेश करता है. सपा के कौशलेंद्र सिंह को स्थानीय होने का लाभ मिला.

स्पष्टीकरण- रिपोर्ट की शुरुआत में रामधारी सिंह दिनकर के कविता की वो लाइन भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को समर्पित है. www.dpillar.com की इस रिपोर्ट का मकसद ये बताना था :

“थी सभा सन्न, सब लोग डरे,
चुप थे या थे बेहोश पड़े।
केवल दो नर ना अघाते थे,
धृतराष्ट्र-विदुर सुख पाते थे।
कर जोड़ खड़े प्रमुदित,
निर्भय, दोनों पुकारते थे ‘जय-जय”
दिनकर

DPILLAR