#SSCscam सवाल: क्या आंदोलनकारी छात्रों को जेपी की जरुरत है, योगेन्द्र यादव : हां

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Team dPILLAR: कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI से कराने के लिए चल रहे छात्र आंदोलन को अब दो हफ्ते से अधिक हो गए हैं. देश की राजधानी दिल्ली समेत दूसरे अन्य शहरों में छात्र लगातार धरना देकर सरकार और आयोग के सामने अपनी मांगे रख रहे हैं. मगर दोनों में से कोई उनकी सुन नहीं रहा. ना तो अब तक SSC की और से धांधली को लेकर कोई स्पष्ट बात कही गई है, और ना सरकार ने लिखित तौर पर छात्रों की मांगें मानी है.

आंदोलनकारी छात्रों ने उल्टा सरकार औऱ आय़ोग पर आंदोलन तोड़ने का आरोप लगाया है. देश के कई शहरों में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए. जयपुर में लाठी चार्ज तक की नौबत आ गई. छात्र हर बार धांधली के सबूतों को पेश कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर #SSCSCAM पिछले कई दिनों से ट्रेंड कर रहा है.

मगर बावजूद इन सबके शासन-प्रशासन का कोई प्रतिनिधि छात्रों से बात तक नहीं करने आया. देश की राजनीति में भी छात्रों के आंदोलन की आवाज गुम सी हो गई हैं. ऐसा लगता है जैसे ये एक नेतृत्व विहीन आंदोलन हो गया है.

दिल्ली में आंदोलनरत छात्र #sscscam/ फोटो- पवन कुमार सिंह
दिल्ली में आंदोलनरत छात्र #sscscam / फोटो- पवन कुमार सिंह

दिल्ली के लोधी रोड पर धरने पर बैठे अपने युवा साथियों के समर्थन में बिहार के छात्र भी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में पिछले आठ दिनों से धरना दे रहे हैं. दिल्ली में धरना पर बैठे छात्रों को देश की राजधानी होने के नाते थोड़ा बहुत अटेंशन मिल भी जा रहा है, मगर गांधी मैदान में आठ दिनों से हड़ताल पर बैठे छात्रों की सुध लेने राज्य सरकार, विपक्षी पार्टियों और प्रशासनिक महकमे में से किसी का भी प्रतिनिधि नहीं आया है.

सोमवार की तपती दोपहर गांधी मैदान में जब छात्रों के बीच दिल्ली से योगेन्द्र यादव आए तब एकदम से साफ दिखने लगा कि छात्रों को किस कदर एक नेतृत्व की जरूरत है.

हालांकि, छात्रों के बीच ही एक सवाल के जवाब में योगेन्द्र यादव ने ये स्पष्ट कर दिया कि वो छात्रों के नेता नहीं बन सकते. क्योंकि ये छात्रों का आंदोलन है, किसी पार्टी का आंदोलन नहीं है. बकौल यादव,

गांधी मैदान में आंदोनकारी छात्रों से बात करते योगेन्द्र यादव. PHOT/dPILLAR

“आंदोलन का नेता छात्रों के बीच से निकलना चाहिए. किसी पार्टी या पक्ष का नेता छात्रों का नेता नहीं हो सकता. छात्र संगठनों की भूमिका इस आंदोलन में महत्वपूर्ण है. छात्र एक अखिल भारतीय संगठन बना कर अपना नेता चुनें.”

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक बार फिर से छात्रों ने आंदोलन का दामन थाम लिया है. मगर जैसा समर्थन 1974 के छात्र आंदोलन में इसी गांधी मैदान में मिला था, इस बार वो मिलता नहीं दिख रहा है. ऐसे में क्या आंदोलनकारी छात्रों को एक बार फिर से जेपी जैसे किसी नेता की जरूरत है?  इस सवाल के जवाब में योगेन्द्र यादव कहते हैं-

“ हां. मगर  तब जेपी की हैसियत अलग थी. जेपी जैसे नेतृत्व की जरूरत तो है छात्रों को, मगर वो नेतृत्व छात्रों के बीच का ही होना चाहिए.”

देखें क्या कहा योगेन्द्र यादव ने गांधी मैदान में-

आपको बता दें कि गांधी मैदान की गांधी मुर्ति के नीचे ही बिहार के अलग-अलग जिलों से आए सैकड़ों छात्र पिछले आठ दिनों से धरना पर हैं. इस दौरान छात्रों की संख्या में कभी कमी भी हुई तो कभी छात्रों का हुजूम हजारों तक पहुंचा. सैकड़ों छात्रों ने एक दिन भूख हड़ताल भी किया. लेकिन आंदोलनकारी छात्रों के बीच अभी तक बिहार का कोई स्थानीय नेता, विधायक, मंत्री या फिर कथित बुद्धिजीवी वर्ग के लोग नहीं पहुंचे हैं.

गांधी मैदान में छात्रों को आंदोलन से अधिक से अधिक जोड़ने के संदर्भ पर योगेन्द्र यादव कहते हैं,

“यहां के किसी जन प्रतनिधि का छात्रों के साथ नहीं खड़ा होना आना उनकी छात्रों के प्रति निष्ठुरता को दर्शाता है. शायद सभी इस बात के इंतजार में हैं कि कब छात्रों का गुस्सा बढ़े और फिर वे आंदोलन पर दमनात्मक कार्रवाई करके इसे हिंसक भीड़ कह दें.

ऐसे में छात्रों को डॉ अंबेडकर और गांधी के रस्ते पर चलना होगा. सांवैधानिक तरीके से अहिंसा का रास्ता अपनाते हुए आंदोलन को और मुखर बनाना होगा. सोशल मीडिया से लेकर जमीन पर छात्रों को विरोध दर्ज करना होगा. छात्रों की एकता से ही ये संभव है. इसलिए अधिक से अधिक छात्रों को इस आंदोलन से जुड़ना होगा.

नोट- स्वराज इंडिया के संस्थापक और देश के जाने माने राजनीतिक चिंतक योगेन्द्र यादव से dPILLAR की खास बातचीत शीघ्र ही प्रकाशित की जाएगी. तब तक अपने लिए जरूरी खबरों के लिए बने रहें www.dpillar.com पर.

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