‘मैं लेस्बियन हूं! मुझे खुद पर गर्व है’

Sheपोर्टर आज की ख़बर
कुमारी प्रेरणा :  यह कहानी दिल्ली में रहने वाली एक महिला की है, जो पेशे से डॉक्टर हैं. उनकी अपनी इच्छाएं और जिंदगी को जीने का खुद का नज़रिया भी. भारतीय समाज सेक्स को लेकर हमेशा से संकीर्ण रहा है. एक खास तरह से सोचने वाले इस समाज में लेस्बियन और गे की आकांक्षाओं को सेक्सुअल फैंटसी के इर्द-गिर्द रखकर देखा जाता है. पर ऐसा नहीं है. उनके अंदर भी एक इंसान बसता है, शायद हमारी और आपकी तरह. उन्हें भी जीने के लिए प्यार चाहिए होता है, हमारी और आपकी तरह. वो भी बिना शर्त किसी से टूट के मोहब्बत करते हैं.
फोटो- dPILLAR
फोटो- dPILLAR
पेश है ऐसे ही एक शख़्स की कहानी, उन्हीं की जुबानी…

“तुम्हें ये बता दूं कि इन सारी अनकही बातों को पन्नों पर उतारते हुए जितनी दफ़े मेरी नज़र मेज़ पर रखी तुम्हारी तस्वीर पर पड़ती है, मैं हर दफ़े तुमसे इश्क कर बैठती हूं.मुझे बेशर्त, बेवक़्त अपनी ज़िंदगी तुमसे यूं ही इश्क करते हुए बितानी है.”

ज़ाहिरा के नाम लिखी मेरी आखिरी चिट्ठी की ये आखिरी पंक्तियां थीं. हम अक्सर एक-दूसरे को चिट्ठीयां लिखा करते थे. मैं उससे मेडिकल कॉलेज में मिली थी. कॉलेज के सेकेंड इयर में हम अच्छे दोस्त बन गए.
समय के साथ ये दोस्ती कब प्यार में बदल गई पता ही नहीं चला. मैं ज़ाहिरा से पागलों की तरह प्यार करने लगी थी.पांच-छह महीने यूं ही बीतने के बाद मैंने एक दिन उसे सबकुछ बता दिया.

“मुझे लड़के नहीं लड़कियां पसंद है, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं.पूरी ज़िंदगी तुम्हारे साथ गुज़ारने की ख्वाहिश रखती हूं.लेकिन मुझे पता है कि तुम्हारे साथ ऐसा नहीं है. इसके बावजूद मैं तुम्हें ये क्यों बता रही हूं, नहीं मालूम. तुम मेरी इस बात को समझोगी या नहीं, ये भी नहीं मालूम.”

मगर ज़ाहिरा ने मेरी इस बात को बड़ी ही संजीदगी से समझा. हम अच्छे दोस्त बने रहे. कई दफ़े वह मेरे साथ डेट पर भी गयी. मगरहम करीब होकर भी करीब नहीं थे.
ज़ाहिरा से मेरा कोई शारीरिक रिश्ता नहीं था लेकिन मैं खुश थी कि मैंने प्यार जैसे ख़ूबसूरत एहसास को महसूस किया. वह मुझसे अक्सर यह कहा करती कि तुमसे ज़्यादा प्यार मुझे कोई नहीं दे सकता.
एक दिन मैं ज़ाहिरा के ब्वॉयफ्रेंड से मिली. हॉस्टल आकर मैं बहुत रोयी. छुट्टियां भी शुरू हो चुकी थी, मैंने पहले सोचा था कि हॉस्टल में ही रूकूंगी क्योंकि ज़ाहिरा भी रूकने वाली थी.
फोटो- dPILLAR
फोटो- dPILLAR

‘जब से होश संभाला, लड़कियां ही पसंद आईं’

लेकिन इन सब के बाद मैं घर चली गई. छुट्टियों के दौरान मेरे बाकी दोस्तों ने मुझे हिम्मत देने के लिए एक खत भेजा. खत में लिखा था- ‘परेशान मत हो, तुम्हें ज़ाहिरा से भी अच्छी लड़की मिलेगी’.
यह ख़त मां के हाथ लग गई. मां ने कुछ कहा तो नहीं पर जब मैं वापस कॉलेज आ गयी तो अचानक एक दिन वह मुझसे शादी की बातें करने लगी. उन्होंने मेरे लिए लड़का ढ़ूंढ़ना शुरु कर दिया था.
उनका मानना था कि मेरे लेस्बियन होने का कारण मेरागर्ल्स हॉस्टल में रहना है. उन्हें ये नहीं पता कि जब से मैंने होश संभाला, मुझे लड़कियां ही पसंद आती थी.
ऐसा नहीं है कि मैंने लड़कों को डेट करने की कोशिश नहीं की. एक पुरुष मित्र के साथ मेरे शारीरिक संबंध भी रहे और शायद उसी के बाद मुझे यह एहसास हो गया कि सेक्सुअली ही नहीं बल्कि इमोशनली भी मैं लड़कों से अटैच नहीं हो पाऊंगी.

…सेक्स आसानी से मिल जाता है पर प्यार?

मां के निरंतर दबाव के कारण मैंने एक दिन टिंडर पर अपना प्रोफाइल बनाया. एक गे लड़के ने मुझसे शादी करने का प्रस्ताव रखा. मैं भी बहुत दुखी थी. एक वक़्त के लिए मैंने मां की खुशी के लिए उससे शादी करने का मन भी बना लिया था पर कुछ ही समय के बाद मुझे इस बात का एहसास हुआ कि मैं अपने साथ ग़लत कर रही हूं. सो मैंने मां को साफ शब्दों में कह दिया कि मैं किसी भी लड़के से शादी नहीं कर सकती.
मुझ गर्व है कि मैं लेस्बियन हूं
फोटो- dPILLAR

 

आज मैं 26 साल की हूं. लड़कों में मेरी रुचि हो इसक लिए मां नए उपाय ढ़ूंढती रहती हैं. आजकल वो मुझसे एक योग करवा रही हैं. पापा को अभी तक मेरे सेक्शुअल ओरिएंटेशन की बात नहीं मालूम. मां बताना भी नहीं चाहती. मैं भी डरती हूं. लेकिन आने वाले एक-दो सालों वह भी मुझ पर शादी का दबाव डालने लगेंगे. मगर मैं अपने फैसले पर अडिग हूं.
मुझ गर्व है कि मैं लेस्बियन हूं
फोटो- dPILLAR
सेक्स आसानी से मिल जाता है पर एक लेस्बियन लड़की के लिए प्यार ढ़ूंढ़ना बहुत ही मुश्किल है. हर दूसरा शख्स चाहे वो लड़का हो या लड़की आपके साथ सोना चाहता है,पर प्यार करने की हिम्मत बहुत ही कम लोगों में होती है.
ज़ाहिरा से तो मैं आज भी उतना ही प्यार करती हूं मगर कल को मुझे दोबारा किसी से प्यार हुआतो आपसी सहमति से मैं पूरी ज़िंदगी उसके साथ बिताना चाहूंगी.
मुझे अपनी सेक्सुएलिटी पर हमेशा से गर्व है.
यह भी पढ़ें-

उन तमाम आदमियों के लिए जो मौका पाने पर एक औरत पर थूक देते हैं

हमारी रौशनी: बोल की लब आजाद हैं तेरे, बोल की ज़बां अब तक तेरी है

DPILLAR