#InternationalWomensDay : मुझे कुछ बोलना है

Sheपोर्टर आज की ख़बर

SHEपोर्टर (ऋचा बाजपेयी) – अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस दुनियाभर के लोगों को अपनी आधी आबादी की भयावह स्थिति पर सोचने पर विवश करता रहता है. रिमाइंडर  की तरह यह बताता रहता है कि अभी क्या किया समाज ने अपने आधे वर्क फोर्स को सशक्त करने के लिए. पढ़िये और सुनिये हमारी SHEपोर्टर ऋचा बाजपेयी की लिखी कविता मुझे कुछ बोलना है.

 

बहुत कुछ कहना चाहती हूं

लेकिन चारों तरफ  ये चीखते चिल्लाते शब्द

मेरी आवाज़ को सहमा देते हैं.

कौन सुनेगा, इस नक्कारखानें में तूती की आवाज

चारों ओर से उठता ये बेमकसद सा शोर

खत्म करता जा रहा है मेरी संवेदना को

नहीं कह पाती, रो नहीं पाती

क्योंकि नहीं  बढ़ाना चाहती इस शोर को

पर अंदर ही अंदर घुमड़ना 

और बरस न पाना

सड़ा रहा है, गला रहा है, काट रहा है

भीतर से.

अभी जो नहीं बोल पायी

तो शायद बाद में मवाद ही निकले

इस पीर को मवाद बनने से बचाना है

मुझे कुछ बोलना, कहना और सुनाना है. 

 

यह कविता ऋचा बाजपेयी की आवाज़ में..

 

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DPILLAR