Questions Of #SSCscam : पटना में पेपरलीक, देश भर में छात्र आंदोलन, फिर भी क्यों जारी है परीक्षाएं ?

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नीरज प्रियदर्शी : बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को हुई एसएससी की CHSL की परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने खबरें छप चुकी हैं. एसएससी के मध्य क्षेत्र के रिजनल सेंटर की ओर से जारी नोटिफिकेशन में इस बात की पुष्टि की गई थी. क्योंकि एक छात्रा जो परीक्षा देकर बाहर निकली थी, उसके पास प्रश्नपत्र में पूछे गए सारे सवालों के हल थे. एसएससी के रिजनल डायरेक्टर की ओर से जारी की गई नोटिस में इस बात का भी उल्लेख था कि आरोपित छात्रा की उम्मीदवारी रद्द करते हुए उसके खिलाफ संबंधित थाने में जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज की जाए.

SSC के मध्य क्षेत्र के रिजनल डायरेक्टर की ओर  से जारी नोटिस

परीक्षा में इतनी भारी अनियमतता उजागर होने के बाद भी क्या कारण है कि सरकार और आयोग इसकी जांच के लिखित आदेश जारी नहीं कर रहे हैं? क्या इतना कम नहीं है ये स्पष्ट करने के लिए SSC की चल रही CHSL की परीक्षा के प्रश्न पत्र कहीं ना कहीं से लीक हुए हैं.

#SSCscam EXCLUSIVE: पटना में लीक हुआ है CHSL की परीक्षा का पेपर, आंदोलन कर रहे छात्रों ने लड़की को पकड़ा

यदि लीक नहीं भी हुए हैं तो परीक्षाओं में जमकर धांधली हो रही है. वरना किसी भी अभ्यर्थी के पास सारे सवालों और उनके जवाबों वाला पेपर परीक्षा केंद्र के बाहर कैसे मिलता. बावजूद इसके कि परीक्षाओं में इतनी भारी अनमियमितता की पहले जांच कराई जाए, कर्मचारी चयन आयोग ने चल रही परीक्षाओं को रद्द नहीं किया. आज भी CHSL की परीक्षा बाकी सभी केंद्रों पर हुई है.  इधर देश भर के छात्र पिछले डेढ़ हफ्ते से आंदोलन पर हैं.

गांधी मैदान में आंदोलनरत छात्र #sscscam
गांधी मैदान में आंदोलनरत छात्र #sscscam

www.dpillar.com सरकार के एक अंग SSC और इसके चेयरमैन अशिम खुराना से छात्रों के इन सवालों के जवाब की अपेक्षा करता है:

क्या SSC के सेंट्रल जोन के रिजनल डायरेक्टर की प्रेस विज्ञाप्ति की कोई औकात नहीं है?

क्योंकि पटना से पेपरलीक होने की खबरें आने के बाद आयोग के मध्य क्षेत्र के रिजनल डायरेक्टर की ओर से जारी बयान में ये साफ-साफ लिखा हुआ था कि जिस छात्रा के पास से प्रश्न मिले थे उसे नामजद बनाकर पेपरलीक की जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज की जाए.  बावजूद इसके अभी तक कंकड़बाग थाने में इस मामले से संबंधित कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है?

गांधी मैदान के आंदोलनकारी छात्रों ने ये आरोप लगाया है कि कंकड़बाग थाना शिक्षा माफियाओं के दबाव में प्राथमिकी दर्ज नहीं कर रहा है.

आर एस लैब के उसी सेंटर पर परीक्षा देने गए छात्रों ने आऱोप लगाया कि जिस वक्त वे आरोपित लड़की को पकड़ कर हंगामा कर रहे थे, तभी केंद्र पर्रबंधन लड़की को उनसे छुड़ाकर लैब के अंदर ले गया और फिर वो लड़की कभी सामने नहीं आई.

इसका मतलब साफ है कि परीक्षा केंद्र से लेकर इक्जाम वेंडर और थानों तक शिक्षा माफियाओं की भारी पहुंच है. और ये माफिया सरकार के हैं.

 

क्या पेपरलीक केवल पटना के आर एस डिजिटल लैब स्थित परीक्षा केंद्र पर हुआ था?

क्योंकि एसएससी की परीक्षाओं के आयोजन के लिए एक ही इक्जाम वेंडर मोटी रकम चुका कर एक से अधिक परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाएं कराने का ठेका लेते हैं. ऐसे में कंकड़बाग के आर एस डिजिटल लैब के दूसरे कनेक्शन की जांच कराए बगैर आयोग ने उन सेंटरों पर आज भी परीक्षा क्यों जारी रखी.

परीक्षा देने गए छात्रों ने, जो पिछले चार दिनों से गांधी मैदान में आंदोलन पर भी हैं ये आऱोप लगाया है कि परीक्षा केंद्रों पर प्रबंधन उनके साथ खराब व्यवहार कर रहा है. कई छात्रों ने कहा कि गड़बड़ी का आरोप लगाने पर छात्रों को बीच परीक्षा केंद्र से बाहर तक निकाल दिया जा रहा है.

कुछ छात्र ये आरोप लगा रहे थे कि इक्जाम वेंडर्स का कनेक्शन स्थानीय नेताओं से है. उन्हीं की सह पर परीक्षा केंद्रों की खरीद-बिक्री होती है.

क्या छात्रों के आरोप का जवाब आयोग के चेयरमैन के पास है?

क्योंकि आयोग के चेयरमैन के पास बस इतना सा जवाब है. It has been reported that one question was partially visible on thescreen of the candidates during Shift-III on 8.3.2018 of the Combined Higher Secondary (10+2) Level Examination (Tier-I) 2017. The Commission would suitably compensate all the candidates for the said question as per the rules of the Commission. (ये शिकायत मिली है कि CHSL टियर-1 की आठ मार्च की तृतीय पाली की परीक्षा का केवल एक प्रश्न वो भी आंशिक रूप से स्क्रीन पर दिखा है. इसलिए आयोग अपनी नियमों के मुताबिक उक्त प्रश्न पर छात्रों को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति करेगा).

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चेयरमैन खुराना के इस बयान पर सवाल उठाते हुए आंदोलनकारी छात्रों ने बातचीत में कहा कि पटना से प्रश्नपत्र लीक होने की खबर है वो पहली पाली के दौरान की है. और उसमें केवल एक सवाल ही नहीं बल्कि सारे सवाल दिख रहे थे.

यदि चेयरमैन खुराना इस बात को स्वीकार करते हैं कि तृतीय पाली का प्रश्न पत्र भी आंशिक रूप से लीक हुआ था तो इसका मतलब स्पष्ट है कि पहली पाली का लीक पेपर भी सोशल मीडिया के जरिए दूसरे इक्जाम सेंटर्स पर वायरल किया गया था.

क्या परीक्षा में धांधली नहीं होने की गारंटी लेने के लिए आयोग तैयार है?

क्योंकि आयोग अभी तक ये नहीं माना है कि परीक्षाओं में धांधली चल रही है. इसका बानगी पेश करता है एसएससी की वेबसाइट का वो नोटिफिकेशन बोर्ड जिसमें आयोग की और से पल-पल बदलते बयान देखने को मिल रहे हैं. इसके पहले के बयान में चेयरमैन के नाम से ये कहा गया था कि “ आंदोलनकारी छात्रों के डेलिगेशन से हुई बातचीत के बाद CGL टियर-2 2017 की 17 फरवरी से 21 फरवरी के बीच हुई परीक्षा के प्रश्न सोशल मीडिया पर वायरल करने की शिकायतों की जांच CBI से कराने के लिए गृह मंत्रालय से सिफारिश की गई है.

जबकि दिल्ली के लोधी रोड स्थित CGA कॉमप्लेक्स के बाहर आंदोलन कर रहे छात्र सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच कराने की मांग पर अड़े हैं. ताकि अपने अधीन होने पर सरकार जांच प्रक्रिया में CBI का इस्तेमाल अपने तोते की तरह नहीं करे.

एसएससी की ओर से जारी इस नोटिस पर सवाल और भी गहरा जाता है, जब दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्र इस बात से इन्कार कर देते हैं कि उनका कोई प्रतिनिधि सांसद मनोज तिवारी के साथ एसएससी के चेयरमैन से मिला था. छात्रों का कहना है कि बीजेपी की आईटी सेल के लोग सोशल मीडिया पर मनोज तिवारी के ट्वीटर अकाउंट से फर्जी तस्वीरें पोस्ट की थीं.

 

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