मातृभाषा दिवस विशेष : एगो भाषा जवन बाई डिफाल्ट आवेला

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नबीन कुमार:  परसों हमरा सोझा इ सवाल अउवे कि आखिर मातृभाषा से प्रेम के पैमाना का हो सकेला.  मूल रुप से अइसन सवाल के जवाब हम जान बुझ के ना देनी, काहें कि कुछ सवाल प्रश्नकरता से ही जबाब जोहेला. ओही सुची के सवाल ह इ. बाकिर, हमार जवन आपन सोच बा ओह के राखत बानी.

“हमरा खाति मातृभाषा, एगो भाषा ह, एकरा आ बाकी भाषा में अतने अंतर बा कि इ रउवा संगे बाई डिफाल्ट यानि बिना कवनो पसेवा के, अलग प्रयास के इ रउवा खुन में, सोच में अउर रउवा आत्मा में बसल रहेला.”

लोग कहेला कि मातृभाषा के असर सुभाव प भी परेला. हँ जदि तीन चार पीढ़ी ले घर में मातृभाषाई संस्कार ना होखे त फेरु बाई डिफाल्ट वाला कथन लागू नइखे होत. कहे के माने कि जदि छठ, फगुआ, चउथ, खिचड़ी आदि तीज त्योहार, बिआह शादी के परम्परा आदि जवन भोजपुरी में बा, आ ओह घर में चलत बा त भले ओह घर के समाज के भाषा कवनो रहे, बाकिर ओह घर में आवे वाला हर नवका पीढ़ी प भोजपुरी के तासीर रहबे करी.

हमनी के सामान्य जीवन में क तरह के भाषा आवेली स. जइसे,

पहिला मातृभाषा

दुसरा कर्मकांड के भाषा/धर्म के भाषा

तीसरा सम्पर्क के भाषा

चउथा कानून/सत्ता के भाषा

पांचवा रोजगार के भाषा

छठा शिक्षा के भाषा आ

सातवा मनोरंजन के भाषा

हो सकेला कि केहू खातिर सातो के सातो एकही भाषा होखे भा छओ के छव गो भाषा होखे. जइसे ब्रिटीश नागरिक खाति ओकरा कर्म धर्म रोजगार शिक्षा सम्पर्क मातृ भाषा अंग्रेजी ह.

आखर भोजपुरी भाषा के संघर्ष के लड़ाई लड़े वाला संगठन ह
आखर भोजपुरी भाषा के संघर्ष के लड़ाई लड़े वाला संगठन ह

जबकि हमरा खातिर, मातृभाषा भोजपुरी, कर्मकांड/धर्म के भाषा संस्कृत, शिक्षा के भाषा हिन्दी, सम्पर्क के भाषा भोजपुरी, हिन्दी, मराठी, अंग्रेजी, उर्दू, अवधी अउर मगही आदि, कानून के भाषा अंग्रेजी, उर्दू आ हिन्दी, रोजगार के भाषा अंग्रेजी, मनोरंजन के भाषा भोजपुरी से ले के हिन्दी अंग्रेजी ईरानी जापानी चाइनीज, तमिल, तेलगु, बंगाली, मराठी आदि रहल बा.

अब मूल सवाल बा कि मातृभाषा से प्रेम के पैमाना कतना?

प्रेम के कवनो सीमा ना होला, चाहें उ प्रेम के कवनो रुप होखे बाकिर, जब बात मातृभाषा से प्रेम के होइ. त कम से कम अतना उम्मेद त राखले जा सकेला कि ओतना प्यार जरुर दिहीं जतना प्यार रउवा अपना शिक्षा, रोजगार, कानून, कर्मकांड/धर्म, सम्पर्क भाषा के देनी. आ मातृभाषा खातिर प्रेम एह में से कवनो से कम ना रहे.

अब सवाल उठता कि मान ली भोजपुरी कानून के, रोजगार के, शिक्षा, कानून, मनोरंजन आदि के भाषा सोगहग रुप में नइखे त फेरु एह प्रेम के जाहिर करे के उपाय का बा?

आखर भोजपुरी भाषा के संघर्ष के लड़ाई लड़े वाला संगठन ह
आखर भोजपुरी भाषा के संघर्ष के लड़ाई लड़े वाला संगठन ह

त उपाय इहे बा कि अपना मातृभाषा में जब जहाँ मौका मिले ओजुगा बोलीं, अपना मातृभाषा में जब जहाँ मौका मिले ओजुगा लिखीं, मातृभाषा के किताब पढ़ीं, अपना मातृभाषा के नीमन चीझू के प्रचार प्रसार करीं, मातृभाषा में कुछ बाउर हो रहल बा त ओकर विरोध करीं. मातृभाषा से जुड़ल संस्कार, संस्कृति, रिति-रिवाज, परम्परा, खान-पान, पहिरावा आदि से जुड़ल रहे के कोशिश करी आ एकरा बारे में नीमन बात सबका सोझा ले आईं.

जदि हर भोजपुरिया इ करे लागो त फेरु भोजपुरी रोजगार से ले के शिक्षा धइले, कानून तकले मय के भाषा बन सकेले.

नोट- मातृभाषाओं को जिंदा रखने के लिए हमारी कोशिश है कि मातृभाषा में लिखे हुए को प्रकाशित किया जाए. यदि आपने भी अपनी मातृभाषा में कुछ लिखा है तो हमें dpillarnews@gmail.com पर भेजें. चलिए साथ मिलकर रखते हैं अपनी मातृभाषाओं को जिंदा.

DPILLAR