देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में देश के सबसे अमीर अम्बानी परिवार का दामाद शामिल

आज की ख़बर खिड़की के पार

Team dPILLAR : देश भर से आ रही खबरों के जरिए अब तक आपको पता लग गया होगा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लोक का एक बार फिर से कट गया है. देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक यानी पंजाब नेशनल बैंक से लोन लेकर 1130 करोड़ रुपए गबन करने का मामला सुर्खियों में है. नीरव मोदी नाम के हीरे के व्यापारी के खिलाफ 280 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप पंजाब नेशनल बैंक की ओर से सीबीआई कोर्ट लगाया गया है. सीबीआई की जांच में प्रथमदृष्टया ये मामला केवल 280 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि अलग-अलग लोगों और संस्थाओं के जरिए 1130 करोड़ रुपये के घपले का लग रहा है.

चुंकि ये मामला पुराना है, मगर मीडिया की सुर्खियों में 10 दिन बाद आया है, इसीलिए इस पूरे घोटाले में सीबीआई के भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं. मगर इन सबके बीच एक बात जो सीबीआई कोर्ट में दायर आरोप पत्र से निकल कर सामने आई है, मगर देश भर की मीडिया ने उसके बारे में आपको नहीं बताया है वो ये कि 1130 करोड़ रुपये के इस घोटाले में हिन्दुस्तान के सबसे अमीर उद्योगपति घराने अंबानी परिवार के दामाद का नाम भी शामिल है.

वो खबर जो अभी तक मीडिया रिपोर्ट्स का हिस्सा नहीं बन पाई है, उसे dpillar.com आपके लिए लेकर आया है इंदौर के सिटिजन जर्नलिस्ट गिरिश मालवीय की खिड़की के पार से ….

आगे पढ़िए क्या लिखते हैं गिरिश :

कल जिस नीरव मोदी का नाम पीएनबी घोटाले में सामने आ रहा है उसके सगे भाई निशाल मोदी से, धीरूभाई अंबानी की बेटी यानी मुकेश और अनिल अंबानी की बहन दीप्ति सलगांवकर की बेटी इशिता की शादी हुई है. सीबीआई कोर्ट में दायर एफआईआर में निशाल मोदी का नाम भी शामिल है.

निशाल मोदी दायें से पहले Photo/Google
निशाल मोदी दायें से पहले Photo/Google

कल पीएनबी बैंक में जो घोटाला सामने आया है, उसने पूरे विश्व मे भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की इज्जत की धज्जियाँ बिखेर दी है. बात जरा लम्बी है, मगर देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक का मसला है, सो आपके लिए निहायत जरूरी है. आगे पढ़ते चलिएगा, क्या पता मीडिया इसे किस तरह से दिखाएगा, पर वास्तव में यह घोटाला बताता है कि हमारी बैंकिंग व्यवस्था की चाबी किस तरह के भ्रष्ट लोगो के हाथों में आ गयी है.

आपकी जानकारी के लिए बता दूं. पंजाब नेशनल बैंक देश में एसबीआई के बाद सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है. और जो रकम घोटाले की बताई जा रही है, वह 11,330 करोड़ रुपए (1.8 अरब डॉलर) है. 2017 में पंजाब नेशनल बैंक की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि बैंक का नेट इनकम 1320 करोड़ रुपये है. यानी घोटाला सालभर की नेट इनकम का आठ गुना है. घोटाले के सामने आने के बाद शेयर बाजार में पीएनबी के शेयरों की कीमत 10 फीसद गिर गई है. दूसरे बैंकों के शेयरों ने भी खूब गोता लगाया है. अब पीएनबी तो अपना दामन बचाते हुए कह रहा है कि इस रकम से हुए लेन-देन अनिश्चित स्वरूप के हैं.

लेकिन यदि लेन-देन की वैधता साबित हो जाती है तो बैंक को इतनी रकम का प्रावधान अपने बैलेंसशीट में करना होगा. यानी जिसकी आय 1320 करोड़ रुपये वार्षिक हो, उसे 11330 करोड़ रुपये भरने ही होंगे. आपको बता दें कि यह रक़म बैंक के मार्केट कैप का एक तिहाई है.

अब जिसके बारे में मीडिया चुप होकर बैठ गया है वह भी सुन लीजिए कि यह घोटाला किया किसने है ?

दरअसल भारत मे डायमंड ओर डायमंड ज्वेलरी से जुड़ा व्यापार 70 हजार करोड़ रुपए का है. इस व्यापार का मुख्य गढ़ सूरत ओर मुम्बई है. कहते हैं कि इस इंडस्ट्री के छह बड़े बिजनेस टाइकून हैं, जिनके आसपास यह सारा व्यापार घूमता है. उनमें से दो टाइकून इस घोटाले में संलिप्त पाए गए हैं. पहले हैं नीरव मोदी और दूसरे हैं मेहुल चोकसी.

नीरव मोदी ज्वेलरी डिजाइनर कहे जाते हैं. और 2.3 अरब डॉलर के फ़ायरस्टार डायमंड के संस्थापक हैं. यह साल 2013 में फ़ोर्ब्स लिस्ट ऑफ़ इंडियन बिलिनेयर में आए थे, और तब से अपनी जगह बनाए हुए हैं. नीरव देश के सबसे रईस लोगों की गिनती में 46वें पायदान पर खड़े हैं. इनके खिलाफ एक हफ्ते पहले भी 280 करोड़ की धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ. नीरव की पत्नी एमी ओर भाई निशाल मोदी भी इस घोटाले में शामिल हैं.

दूसरे आरोपी हैं मेहुल चोकसी. आपने नक्षत्र, संगिनी और अश्मि जैसे ब्रांड का नाम सुना होगा. मेहुल चोकसी इसे बनाने वाली कम्पनी गीतांजलि जेम्स के मालिक हैं. ओर नीरव मोदी के चाचा हैं. पर ऐसा नही है कि गीतांजली जेम्स इससे पहले बिल्कुल साफ-सुथरी कम्पनी रही हो. 2013 में ही सेबी ने इसके खिलाफ कुछ एक्शन लिया था. उन पर आरोप थे कि गीतांजलि में ट्रेड करने के लिए चोकसी 25 शैल कंपनियों को फाइनैंस करते थे.

लेकिन 2013 भी छोड़िए आरोपी नीरव मोदी के यहाँ जनवरी 2017 में आयकर विभाग ने घर समेत 50 दफ्तरों पर छापेमारी की थी. और उसी वक़्त इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने गीतांजली ग्रुप के दफ्तरों पर भी रेड मारी थी. यह मामला तभी खुल सकता था लेकिन कुछ नहीं किया गया.

अब आते हैं उस पक्ष की ओर जिसे समझना बहुत आवश्यक है कि यह घोटाला किया कैसे गया ?

आपने कुछ दिन पहले यह सुना होगा कि अमित शाह के बेटे को एक प्राइवेट वित्तीय कम्पनी ने लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किया था यहाँ भी कुछ ऐसा ही मामला है.

दरअसल नीरव मोदी पीएनबी की मुम्बई कारपोरेट ब्रांच से हासिल एलओयू के आधार पर दूसरे देशों में कर्ज हासिल करता था. यह काम वर्ष 2010 से ही चल रहा था.

Photo/Google
Photo/Google

एल ओ यू का अर्थ है “लेटर ऑफ अंडरटेकिंग”. यह एक बैंक शाखा की तरफ से , दूसरे बैंक शाखा को जारी एक ऐसा प्रपत्र है जो निश्चित खाताधारकों के पक्ष में दी गई एक गारंटी होती है. इसके आधार पर दूसरे जगह स्थित बैंक शाखा उस ग्राहक को कर्ज की सुविधा देते हैं.

नीरव मोदी पीएनबी की उक्त शाखा से हासिल एलओयू के आधार पर दूसरे देशों में कर्ज हासिल करता था. मोदी इस कर्ज को समय पर चुका देता था और बात दबी रहती थी. लेकिन हाल ही में नीरव मोदी ने कर्ज का भुगतान नहीं किया.

हुआ यूं कि गड़बड़ी में शामिल पीएनबी के अधिकारियों ने अधिक रिश्वत की मांग की. मोदी ने इसे देने से मना कर दिया. इसके जवाब में उसे पीएनबी ने भी एलओयू जारी नहीं किया ओर वर्षों से चल रहा यह चक्र टूट गया. ऐसे में एक विदेशी बैंक ने हांगकांग की नियामक एजेंसी के साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक को सूचना भेज दी.

आरबीआइ ने जब पीएनबी से जवाब-तलब किया तो उसके पास इसे सार्वजनिक करने और मामला की जांच करवाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा. लेकिन यह मामला अब सिर्फ पीएनबी तक ही सीमित नहीं रह गया है. पता चला है कि यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक और निजी क्षेत्र के एक्सिस बैंक ने भी पीएनबी की तरफ से गड़बडी करने वाले खाताधारकों को जारी एलओयू के आधार पर कर्ज दिए हैं.

सबसे अधिक शर्मिंदगी की बात तो यह है कि विदेशी बैंकों को भी एक तरह से धोखा दिया गया है. यह मामला भारतीय बैंकिंग पर लग चुका बदनुमा दाग है. यह मामला टिप ऑफ द आइसबर्ग भी साबित हो सकता है, क्योंकि जानकारों की मानें तो बैंक एलओयू जारी करने का यह धंधा अनाधिकृत तौर पर आयातकों के साथ मिल कर खूब करते हैं. और इसे परोक्ष तौर पर उन्हें शीर्ष अधिकारियों से अनुमति होती है.

अब इस केस में अम्बानी के दामाद शामिल हैं. इसीलिए मोदी सरकार के वित्त मंत्रालय के बैंकिंग विभाग में संयुक्त सचिव लोक रंजन जी कह रहे हैं कि ‘यह एक बड़ा मामला नहीं है और ऐसी स्थिति नहीं है. जिसे कहा जाए कि हालात काबू में नहीं हैं।’

अम्बानी के दामाद का मामला हो तो हालात क्यों न काबू में बताए जाएंगे. शायद यह घोटाला भी अच्छे दिनों की गिनती में आ जायेगा.

 

DPILLAR