ओड़िसा में है अपनी “पैडवुमेन” : बी गोपम्मा

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Team dPILLAR: पैडमैन. यानी अरूणाचलम मुरूगनाथम. सस्ते सैनिटरी नैपकिन बनाने वाली मशीन को इजाद कर जब देश में नाम कमा रहे थे, तभी ओड़िसा में भी बी गोपम्मा नाम की एक महिला कुछ किशोरियों को साथ लाकर एकदम इसी मकसद पर काम कर रही थी.

अक्षय कुमार की नई फिल्म पैडमैन के आने के साथ ही सुर्खियों में असली पैडमैन अरुणाचलम मुरुगनाथम भी हैं.  सिनेमाघरों में पैडमैन फिल्म देखकर आज जब मुरुगनाथम के काम को सारी दुनिया सलाम कर रही है. तभी ओड़िशा की पैडवुमेन गोपम्मा पहले की तरह ही मीडिया की चकाचौध से दूर अपने गांव और आस-पास के इलाकों की महिलाओं को साथ लेकर सस्ते सैनिटरी नैपकीन ना सिर्फ तैयार करा रही हैं बल्कि इसे ग्रामीण महिलाओं तक सुलभ भी बना रही हैं.

dpillar.com आगे बतायेगा कौन हैं पैडवुमेन बी गोपम्मा!

गंजाम जिले के मरकंडी गांव की बी गोपम्मा अपने आस-पास की किशोरियों और स्थानीय स्वयं समूह की महिलाओं को साथ लेकर सैनिटरी नैपकीन बनाने की दिशा में कुछ प्रयोगों के साथ काम कर रही थीं. थोड़े दिनों में ही गोपम्मा और उनकी साथी महिलाओं का प्रयास निकटवर्ती इलाकों में चर्चित होने लगा.

गोपम्मा ने गांव में महिलाओं को महवारी के दौरान परेशानियों को झेलते हुए बहुत करीब से देखा था. मगर उनके लिए पहली चुनौती थी उन महिलाओं से इस मसले पर कैसे खुलकर बात की जाए और सबको साथ लाया जाए. इसके लिए  सबसे पहले उन्होंने स्वयं सेवी समूह के एक संगठन दिव्य ज्योति महिला विकास के साथ मिलकर सैनिटरी नैपकिन के प्रयोग और माहवारी के दौरान के रख-रखाव के तरीकों का अध्ययन किया.

मुरूगनाथम से प्रशिक्षण लेकर आये वात्सल्य फाउंडेशन के श्यामसुंदर बाडकर ने गोपम्मा की मदद की. उन्होंने ही मशीन लगाने और सैनिटरी नैपकिन बनाने के लिए महिलाओं को प्रशिक्षित किया.

गोपम्मा कहती हैं  “हम ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों में अच्छी स्वास्थ्य और स्वच्छता को सुनिश्चित करना चाहते थे. इसिलिये सैनिटरी नैपकिन बनाने वाली मशीन लगवाने को प्रोत्साहन दे रहे थे. जिससे महिलाओं को रोजगार से भी जोड़ा जा सके.”

गोपम्मा का आइडिया जमीन पर आ चुका था. नैपकीन का नाम “खुशी” रखा गया.  इसे आम जन तक पहुंचाने का काम भी गोपम्मा और उनकी साथियों ने खुद ही किया. स्वंय सेवी समूहों की साथी महिलाएं नजदीकी खुदरा दुकानों में उसे प्रचारित कर रही थीं. किशोरियां उसे अपने घरों तक लेकर गईं.

इस प्रोजेक्ट ने स्थानीय महिलाओं को रोजगार का एक सुनहरा मौका दिया. और प्रत्येक गांव इसके प्रचार में लग गया. फिलहाल ओड़िशा के गंजाम जिले के प्रायः गांवों में गोपम्मा और उनकी साथियों के काम की झलक दिखाई देती है. गोपम्मा अपने इस प्रयास को ओड़िसा सरकार के सामने भी ले जाना चाहती हैं.

अक्षय कुमार अभिनित फिल्म “पैडमैन” आजकल लोगों की जुबान पर है. फिल्म मुरूगनाथम के सच्चे संघर्ष पर आधारित है. माहवारी और सैनिटरी नैपकीन को लेकर संस्कृती के मकड़जाल में फंसे देश में अक्षय कुमार की इस फिल्म ने एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है.

फिल्म के प्रमोशन के दौरान अक्षय कुमार चुनौती के तौर पर लोगों से अपील की है. कि वे हाथ में सैनिटरी नैपकिन लेकर सोशल मीडिया पर अपनी सेल्फी पोस्ट करें. लोग इस चुनौती को बड़े पैमाने पर स्वीकार कर हाथ में सैनिटरी नैपकिन लिए सेल्फी पोस्ट कर रहे हैं.

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