#Sheपोर्टर : दीपिका की चिट्ठी स्वरा का माखौल उड़ाती है

Sheपोर्टर

Sheपोर्टर ( प्रतिमा त्रिपाठी ) : मैंने दीपिका को कभी पसंद क्यों नहीं किया! ये सवाल मुझसे पूछा जाता, उसके पहले दीपिका ने खुद ही इसका जवाब दे दिया है. शुरू में सोचती थी कि ये महज एक पूर्वाग्रह तो नहीं. क्योंकि जब उन्होंने फिल्मफेयर में चिट्ठी पढ़ी थी तो पहली बार सुनकर लगता था कि ये सचमुच एक पिता के लिए बेटी के नाम की चिट्ठी थी. मगर जब कंटेंट पर गौर किया तो लग गया कि वो चिट्टी प्रेम का सबूत ना होकर तंज थी. जैसे अमिताभ बच्चन ने अपने बेटे अभिषेक की फिल्म “गुरु” की रिलीज़ पर किया था. जेनुइन लव की बजाय खून का गर्व था जिसमें. कुछ इसी तरह दीपिका की चिट्ठी भी कंगना पर तंज थी.

मेंटल प्रॉबलम्स पर  दीपिका का खुल कर बोलना मुझे अच्छा लगा था. लेकिन फिर उन्होंने #MyBodyMyChoice वीडियो बना दिया. और जब उसके बारे में पूछा गया तो यू टर्न ले लीं. मगर कोई तर्क नहीं दे पायीं.  ना सपोर्ट का ना विरोध का. फिर फिल्मों का सेलेक्शन भी तो आपकी थिंकिंग लेवल को तय करता है कि आप कितने जागरूक हैं. (अगर आप एक स्टेबल पोजीशन पर आ चुके हों तो).

एक बार फिर दीपीका ने जिस तरह का जवाब स्वरा भास्कर की चिट्ठी का दिया है, उसमें भी कोई तर्क नहीं बल्कि मख़ौल है. हम कब इतने ईमानदार बनेंगे जब खुद की आलोचना खुद कर सकेंगे. अपने आपको भी तर्क की कसौटी पर कस सकेंगे. कॉन्फेशन कर सकेंगे. या फिर जब तक मुद्दे व्यक्तिगत रूप से परेशान ना करने लगे तब तक कुछ नहीं महसूस करेंगे?

जिन लोगों को यंग माइंड्स अपने आदर्श समझते हैं, वो खुद अपना माइंड नहीं रखकर PR के क्लोन ही रह जाएं तो ये उनकी समाज और शिक्षा के बारे में बहुत कुछ बताता है. फिर फेमिनिज्म का मतलब समझे बग़ैर फैशनेबुल टर्मिनोलॉजी का इस्तेमाल करके खुद को फेमिनिस्ट कह देने का मतलब क्या समझा जाए?  क्या उन्होंने नाक काटने की धमकी पर जो लॉ एंड ऑर्डर की कमान संभालते हैं, उनसे सवाल पूछे?  इस तरह का पैसिव तरीका एक सोच के प्रति उनके स्टैंड की पोल खोल देता है.

उनकी सारी कवायद बाजार में अपनी जगह बनाने को लेकर है. ना स्टैंड के लिये तर्क दे पाते हैं ऐसे लोग, ना विरोध के लिये. बस वॉल फ्लॉवर हैं. या थाली का बैंगन कह लो. टिपिकल लिबरल जमात. जो बात उन्हें आई-कैंडी बना सके. अगर रेडिकल होना भी कल को बाजार का हिस्सा बन जायेगा तो वो भी प्रोमोट करती नजर आएंगी. शायद सलमान भी आ जाएं साथ. पूरा बॉलीवुड ही आ जाये.

यह भी पढ़ें – Film Review : पद्मावत की हर तीसरी लाइन में “राजपूत” इरिटेट करता है!

 

DPILLAR