दुनिया की कोई ताकत हिन्दुस्तान से आरक्षण खत्म नहीं कर सकती

Image default
आज की ख़बर कला-साहित्य-सिनेमा

आनंद दत्त

केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा शनिवार को रांची एक समारोह में पहुंचे। आरक्षण विषय पर गहन अध्ययन है उनका। ”आरक्षण का औचित्य” नाम से इनकी किताब भी चर्चित रही है। भला इस वक्त देश के सबसे गर्म मुद्दे पर उनसे बेहतर विचार देनेवाला कौन हो सकता था। उन्होंने सीधे कहा कि बिहार में इसी वजह से बीजेपी की हार हुई थी, समय रहते नहीं चेता गया तो यूपी में भी यही होनेवाला है। राजकीय अतिथिशाला में बातचीत के खास अंश…

 

उपेन्द्र कुशवाहा, केंद्रीय राज्य मंत्री

शिक्षा में झारखंड की प्रगति से आप कितना संतुष्ट हैं?
रघुवर सरकार जब से बनी है, काफी कोशिश हुई है। यह बात ठीक है कि बहुत कुछ करना है, तमाम राज्यों में करना है।

रघुवर सरकार के किस काम की चर्चा मंत्रीगण दिल्ली में करते हैं?
साथ बैठते हैं तो किसी मंत्री या मुख्यमंत्री की बात करने के लिए नहीं बैठते हैं। हमलोग उसकी चर्चा नहीं करते हैं। वह हमारा विषय भी नहीं है।

मतलब साफ है कोई काम ऐसा नहीं है जिसकी चर्चा की जा सके?
यह हमारा विषय नहीं है कि किसी स्टेट की चर्चा दिल्ली में बैठकर करें।

संघ ने एक बार फिर आरक्षण खत्म करने बात कही है?
दुनिया की कोई ताकत हिन्दुस्तान में आरक्षण व्यवस्था को खत्म नहीं कर सकती है।

 

कितने दिनों तक?
उसके लिए समय की कोई बात नहीं है। लेकिन फिलहाल यह एजेंडा ही नहीं है जिसपर बात हो। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कई बार कहा है कि यह समाप्त नहीं होगा।

फिर चुनाव से पहले आरएसएस ऐसा बयान क्यों देती है?
इसका जवाब तो वही देंगे। लेकिन इतना जरूर हम कहना चाहते हैं चुनाव के समय इस तरह के बयान से नुकसान होता है। और सबसे ज्यादा भारतीय जनता पार्टी का नुकसान होने वाला है। बिहार में भी बीजेपी की हार का सबसे बड़ा कारण यही था। यूपी में भी यही होनेवाला है। समय रहते सचेत होना पड़ेगा।

शिक्षा विभाग के किस काम को यूपी चुनाव में भुनाया जा सकता है?
चुनाव में भुनाने के लिए हमारी सरकार काम नहीं करती है। जनता का जिसमें सबसे अधिक हित हो, वही काम करते हैं।

रांची आप एक निजी स्कूल के समारोह में पहुंचे थे, लेकिन सवाल यह है कि निजी स्कूल अब शिक्षा की गुणवत्ता पर बात करते हैं और सरकारी स्कूल अभी भी मिड डे मील पर ही अटका हुआ है?
देखिये सभी निजी स्कूल बढ़िया नहीं कर रहे हैं। प्राइवेट स्कूल में अभिभावक ही शिकायत करते हैं कि उनका शोषण किया जा रहा है। हां यह बात सही है कि सरकारी स्कूलों में अभी बहुत कुछ किया जाना है। लेकिन यह मामला स्टेट का है। हम सलाह देते हैं, पैसा देते हैं, एकेडमिक मदद करते हैं।

शिक्षा जैसा मुद्दा कब तक सेंटर स्टेट के बीच फंसा रहेगा?
फेडरल सिस्टम है, ऐसे ही चलेगा।

पटना में नाव हादसा हुआ, लेकिन इस बार आपलोगों ने सीएम से इस्तीफा नहीं मांगा?
जनता उनको पांच साल के लिए चुनकर भेजा है। उनको काम करके दिखाना होगा। हम लोग हर बात में इस्तीफा नहीं मांगते हैं। जो मांगते हैं वह सोचें।

DPILLAR